🌸 "हर सुबह भगवान का आभार व्यक्त करें, क्योंकि हर दिन एक नई शुरुआत है।" 🌟 "सकारात्मक सोच से जीवन में चमत्कार होते हैं।" 🙏 "ईश्वर पर भरोसा रखें, और वह आपको सही रास्ता दिखाएंगे।" 🕉️ "भक्ति और श्रद्धा से भरा जीवन, सच्ची खुशी का मार्ग है।" 🌺 "यहां आपको भक्ति भजन, चालीसा, आरती और आध्यात्मिक कहानियों का संग्रह मिलेगा।" ✨ "हनुमान चालीसा का पाठ करें और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करें।" 🌼 "मां दुर्गा की आराधना करें और अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं।" 📜 "रामायण और महाभारत की कहानियों से प्रेरणा लें।" 🧘 "ध्यान और योग के माध्यम से अपने मन को शांति और आत्मा को आनंद से भरें।" 🔔 "भारतीय त्योहारों की महिमा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझें।"

Celebrate Shitala Ashtami – Blessings & Devotion

Shitala Ashtami is a day of devotion, blessings, and spiritual cleansing. Immerse yourself in the traditions and rituals that bring peace and prosperity to your life. Let the divine energy guide you toward a path of positivity and grace.

Start Your Day with Bhajans and Aartis

Begin every morning with soulful Bhajans and Aartis to fill your day with positivity and hope. Let the divine melodies bring you closer to spirituality and inspire you to embrace peace, harmony, and gratitude in every moment.

Embrace Peace, Positivity, and Spirituality

Discover the true essence of life by embracing the power of spirituality. Let the teachings of devotion and faith guide you to a life of love, peace, and inner tranquility. The journey begins with a single step toward the divine.

भक्ति भजन

अपने दिन की शुरुआत मधुर भक्ति भजनों के साथ करें। ये पवित्र भजन आपके मन को शांति, सकारात्मकता और दिव्य ऊर्जा से भर देते हैं। हर सुबह और शाम इन भजनों को सुनकर मन प्रसन्न होता है और जीवन में भक्ति, सुकून और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा और विभिन्न देवी-देवताओं की आरतियों का श्रद्धा से पाठ करने से मन में भक्ति बढ़ती है, नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में शांति मिलती है। नियमित रूप से इनका स्मरण करने से मन को आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। 🙏✨

आध्यात्मिक कहानियां

प्रेरणादायक आध्यात्मिक कहानियां पढ़ें और धार्मिक त्योहारों की परंपराओं को जानें। इन कहानियों के माध्यम से अपने बच्चों और परिवार के साथ धर्म और संस्कृति के मूल्यों को साझा करें।

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करके इशारो बुलाय गई रे – बरसाने की छोरी राधा | Krishna Bhajan Lyrics

राधा गोरी गोरी भजन

राधा गोरी गोरी

करके इशारो बुलाय गई रे, बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....

जो कान्हा मेरो गाँव ना जानों,
ऊँचो बरसानों बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....

जो कान्हा मेरो घर नहीं जानों,
ऊँची हवेली बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....

मेरे अँगना में तुलसी को बिरवा,
तुलसी को बिरवा बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....

जो कान्हा मेरो नाम ना जानों,
राधा रंगीली बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी,
करके इशारो बुलाय गई रे,
बुलाय गयी रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी, राधा गोरी गोरी.....

Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी पर चाय पी सकते हैं या नहीं? जानें व्रत के नियम,अर्थ,कथा,महत्व, पूजा विधि और सही तिथि

                                            


Sheetala Ashtami 2026 इस साल 11 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन मां शीतला की विशेष पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और बीमारियों से रक्षा होती है। लेकिन इस दिन पूजा से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है। आइए जानते हैं शीतला अष्टमी की सही तिथि, पूजा विधि और इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं।


शीतला अष्टमी 2026 कब है | Sheetala Ashtami 2026 Date

हिंदू पंचांग के अनुसार शीतला अष्टमी चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पर्व बुधवार, 11 मार्च को पड़ेगा।

अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च की रात 1:54 बजे से होगी और यह 12 मार्च की सुबह 4:19 बजे तक रहेगी। आमतौर पर श्रद्धालु 11 मार्च को दिन में पूजा-पाठ करते हैं

इस व्रत की तैयारी एक दिन पहले से ही शुरू हो जाती है, जिसे शीतला सप्तमी कहा जाता है। इस दिन घर में अगले दिन के लिए पूरा भोजन पहले ही बना लिया जाता है, क्योंकि शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा या गैस जलाना शुभ नहीं माना जाता।