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जगन्नाथ पुरी मंदिर का इतिहास | Jagannath Temple Puri History, Facts & Significance

🛕 जगन्नाथ पुरी मंदिर का इतिहास | 

Complete History, Facts & Significance 


🌊 परिचय

जगन्नाथ पुरी मंदिर का मुख्य दृश्य ओडिशा में स्थित प्रसिद्ध हिंदू मंदिर

ओडिशा राज्य के पुरी शहर में स्थित Jagannath Temple हिंदू धर्म के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार Lord Jagannath को समर्पित है और चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और विशेष रूप से रथ यात्रा के समय यह स्थान अत्यंत भव्य और जीवंत हो जाता है।


📜 जगन्नाथ पुरी मंदिर का इतिहास

जगन्नाथ मंदिर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है और इसकी स्थापना 12वीं शताब्दी में हुई थी।

👉 इस मंदिर का निर्माण गंग वंश के राजा Anantavarman Chodaganga Deva ने करवाया था।

👉 पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी और इसे लकड़ी (नीम) से बनाया गया है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।


🏛️ मंदिर की संरचना और वास्तुकला

जगन्नाथ मंदिर की वास्तुकला कलिंग शैली (Kalinga Architecture) की अद्भुत मिसाल है:

  • 🏯 मंदिर की ऊंचाई लगभग 65 मीटर है
  • 🚩 शीर्ष पर लगा ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है (एक रहस्य)
  • 🪵 भगवान की मूर्तियां लकड़ी से बनी होती हैं

📌 मंदिर का विशाल प्रांगण और ऊंची दीवारें इसकी भव्यता को दर्शाती हैं


🙏 धार्मिक महत्व (Significance)

जगन्नाथ पुरी का धार्मिक महत्व अत्यंत बड़ा है:

  • ✔️ चार धाम यात्रा का एक धाम
  • ✔️ भगवान विष्णु का पवित्र स्थान
  • ✔️ मोक्ष प्राप्ति का मार्ग

👉 मान्यता है कि यहां दर्शन करने से जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है


🚩 रथ यात्रा का महत्व (Rath Yatra)

जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी ओडिशा का भव्य उत्सव और विशाल रथों का दृश्य

जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी ओडिशा का भव्य उत्सव और विशाल रथों का दृश्य

जगन्नाथ रथ यात्रा पुरी ओडिशा का भव्य उत्सव और विशाल रथों का दृश्य

जगन्नाथ पुरी की सबसे प्रसिद्ध परंपरा है रथ यात्रा

👉 इस उत्सव में:

  • भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा विशाल रथों पर सवार होकर निकलते हैं
  • लाखों भक्त इन रथों को खींचते हैं
  • यह उत्सव पूरे विश्व में प्रसिद्ध है


🔥 रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  • 🚩 मंदिर का ध्वज हमेशा हवा के विपरीत दिशा में लहराता है
  • 🪵 मूर्तियां लकड़ी की बनी होती हैं
  • 🍛 मंदिर का प्रसाद (महाप्रसाद) पूरे विश्व में प्रसिद्ध है
  • 🐦 मंदिर के ऊपर पक्षी नहीं उड़ते (रहस्यमय माना जाता है)
👉 अधिक जानकारी और आधिकारिक अपडेट के लिए आप जगन्नाथ पुरी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं।


🧭 जगन्नाथ पुरी कैसे पहुंचे?

✈️ हवाई मार्ग:

निकटतम हवाई अड्डा – भुवनेश्वर

🚆 रेल मार्ग:

पुरी रेलवे स्टेशन सीधे जुड़ा हुआ है

🚗 सड़क मार्ग:

सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है


दर्शन का समय

  • सुबह: 5:00 AM – 1:00 PM
  • शाम: 4:00 PM – 11:00 PM

📌 रथ यात्रा के समय विशेष भीड़ होती है


📿 जगन्नाथ धाम यात्रा का अनुभव

भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा की लकड़ी की मूर्तियां मंदिर के अंदर


👉 यहां की यात्रा एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है:

  • मन को शांति मिलती है
  • भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है
👉 तिरुपति बालाजी मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. जगन्नाथ पुरी मंदिर कहाँ है?

ओडिशा के पुरी शहर में स्थित है।


2. रथ यात्रा कब होती है?

हर साल जून-जुलाई में आयोजित होती है।


3. क्या गैर-हिंदू मंदिर में जा सकते हैं?

नहीं, केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति है।


4. जगन्नाथ मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

रथ यात्रा, महाप्रसाद और लकड़ी की मूर्तियों के कारण।


🔔 निष्कर्ष

जगन्नाथ पुरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और भक्ति का केंद्र है।

👉 यदि आप जीवन में एक बार चार धाम यात्रा करना चाहते हैं, तो जगन्नाथ पुरी जरूर जाएं।

तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास | Tirupati Balaji Temple History Complete Guide | सम्पूर्ण जानकारी

🛕 तिरुपति बालाजी मंदिर का सम्पूर्ण इतिहास | 

Tirupati Balaji Temple History in Hindi 


🌄 परिचय: तिरुमला की दिव्यता

तिरुपति बालाजी मंदिर तिरुमाला पहाड़ियों पर स्थित भव्य मंदिर का दृश्य

Tirupati Balaji Temple भारत के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार Lord Venkateswara को समर्पित है, जिन्हें बालाजी, गोविंदा और श्रीनिवास के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर आंध्र प्रदेश के Tirumala Hills में स्थित है, जो सात पहाड़ियों (सप्तगिरी) से मिलकर बना है।

👉 माना जाता है कि ये सात पहाड़ियां भगवान शेषनाग के सात फनों का प्रतीक हैं।

👉 अगर आप भगवान विष्णु से जुड़े अन्य स्तोत्र पढ़ना चाहते हैं, तो विष्णु स्तोत्र जरूर पढ़ें।


📜 पौराणिक कथा: भगवान वेंकटेश्वर का अवतार

तिरुपति बालाजी मंदिर की पौराणिक कथा अत्यंत रोचक है और भक्ति से भरपूर है।

एक समय देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु के बीच मतभेद हो गया, जिससे देवी लक्ष्मी वैकुंठ छोड़कर पृथ्वी पर आ गईं।

भगवान विष्णु भी उन्हें खोजते हुए पृथ्वी पर आए और तिरुमला पहाड़ियों में तपस्या करने लगे।
इसी दौरान उन्होंने वेंकटेश्वर रूप धारण किया।

👉 बाद में उन्होंने राजा अकाशराज की पुत्री पद्मावती देवी से विवाह किया।

💡 महत्वपूर्ण मान्यता:

भगवान वेंकटेश्वर ने विवाह के लिए कुबेर से ऋण लिया था, और आज भी भक्तों द्वारा किया गया दान उसी ऋण को चुकाने के रूप में माना जाता है।

👉भगवान विष्णु के अन्य अवतारों के बारे में जानने के लिए विष्णु के 10 अवतार भी पढ़ें।


🏛️ ऐतिहासिक विकास और निर्माण

तिरुमाला पहाड़ियों का सुंदर प्राकृतिक दृश्य जहां बालाजी मंदिर स्थित है

तिरुपति बालाजी मंदिर का इतिहास लगभग 2000 वर्षों से भी अधिक पुराना माना जाता है।

📚 ऐतिहासिक प्रमाण:

  • संगम साहित्य (तमिल ग्रंथ) में मंदिर का उल्लेख
  • 5वीं शताब्दी के शिलालेख
  • प्राचीन यात्रियों के विवरण

👑 प्रमुख राजवंशों का योगदान:

  • पल्लव वंश
  • चोल वंश
  • पांड्य वंश
  • विजयनगर साम्राज्य

👉 इन सभी राजाओं ने मंदिर के विस्तार और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

👉अगर आप अन्य प्रसिद्ध मंदिरों का इतिहास जानना चाहते हैं, तो काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास भी पढ़ें।


👑 विजयनगर साम्राज्य का स्वर्ण युग

तिरुपति मंदिर के विकास में Krishnadevaraya का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • उन्होंने मंदिर को सोना, रत्न और भूमि दान की
  • कई मंडप और संरचनाएं बनवाई
  • मंदिर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध किया

👉 आज भी मंदिर में उनके दान के शिलालेख मौजूद हैं।

👉 व्रत और त्योहार की पूरी जानकारी के लिए एकादशी व्रत कथा जरूर पढ़ें।


🏗️ वास्तुकला और संरचना (Architecture)

तिरुपति बालाजी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतार

तिरुपति मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली में बनी हुई है, जो दक्षिण भारतीय मंदिरों की पहचान है।

🧱 प्रमुख भाग:

  • गोपुरम (मुख्य द्वार)
  • गर्भगृह (जहां भगवान की मूर्ति है)
  • मंडप (सभा स्थल)

👉 गर्भगृह में स्थित भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति अत्यंत दिव्य और रहस्यमयी मानी जाती है।

👉प्रसाद और पूजा विधि के बारे में जानने के लिए लक्ष्मी पूजा विधि भी पढ़ें।


🔱 धार्मिक महत्व: कलियुग के भगवान

भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की दिव्य मूर्ति का दर्शन तिरुपति में

तिरुपति बालाजी मंदिर की द्रविड़ शैली की अद्भुत वास्तुकला


भगवान वेंकटेश्वर को “कलियुग के भगवान” कहा जाता है।

👉 मान्यता है कि:

  • यहां मांगी गई हर सच्ची मनोकामना पूरी होती है

  • यह मंदिर पापों को नष्ट करता है

  • भक्तों को सुख और समृद्धि देता है


💰 दुनिया का सबसे अमीर मंदिर क्यों?

तिरुपति मंदिर के अंदर मंडप और स्तंभों की सुंदर नक्काशी

तिरुपति बालाजी मंदिर को दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में गिना जाता है।

💸 कारण:

  • करोड़ों भक्तों का दान

  • सोना, चांदी, नकद

  • “हुण्डी” में भारी चढ़ावा

👉 प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू प्रसाद भी यहां की पहचान है। 

👉 अगर आप और भी धार्मिक जानकारी पढ़ना चाहते हैं, तो हमारे भक्ति ब्लॉग जरूर देखें।


🌿 परंपराएं और अनुष्ठान

तिरुपति बालाजी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किया गया दान

🪒 1. बाल दान (मुण्डन)

👉 यह अहंकार त्याग और भक्ति का प्रतीक है

🍬 2. लड्डू प्रसाद

👉 मंदिर का विशेष और प्रसिद्ध प्रसाद

🙏 3. दर्शन व्यवस्था

👉 लाखों भक्तों के लिए व्यवस्थित लाइन सिस्टम


🎉 प्रमुख त्योहार

  • ब्रह्मोत्सव (सबसे बड़ा उत्सव)
  • वैकुंठ एकादशी
  • जन्माष्टमी
  • राम नवमी

👉 इन अवसरों पर लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं


🧭 यात्रा गाइड (How to Reach)

  • ✈️ तिरुपति एयरपोर्ट
  • 🚆 तिरुपति रेलवे स्टेशन
  • 🛣️ बस और सड़क मार्ग

👉 तिरुमला तक सड़क और पैदल मार्ग दोनों उपलब्ध हैं

👉तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी सभी अपडेट, दर्शन व्यवस्था और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी के लिए Tirumala Tirupati Devasthanams (TTD) की आधिकारिक वेबसाइट जरूर देखें।


⚠️ रोचक तथ्य (Interesting Facts)

  • मंदिर 3200 फीट ऊंचाई पर स्थित है
  • हर दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन करते हैं
  • बालाजी की मूर्ति को “जीवित” माना जाता है
  • मंदिर लगभग 24 घंटे खुला रहता है


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. तिरुपति बालाजी मंदिर कहाँ है?

आंध्र प्रदेश के तिरुमला पहाड़ियों में स्थित है।


2. बाल दान क्यों किया जाता है?

यह अहंकार त्यागने का प्रतीक है।


3. तिरुपति मंदिर इतना प्रसिद्ध क्यों है?

यह कलियुग के भगवान वेंकटेश्वर का मंदिर है।


4. लड्डू प्रसाद क्यों प्रसिद्ध है?

यह मंदिर का पवित्र और विशेष प्रसाद है।


5. दर्शन का सबसे अच्छा समय क्या है?

सुबह जल्दी या कम भीड़ वाले दिन


🔔 निष्कर्ष (Conclusion)

तिरुपति बालाजी मंदिर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भक्ति, आस्था और विश्वास का जीवंत प्रतीक है।

👉 यहां आने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में नई दिशा मिलती है।

अगर आपने अभी तक तिरुपति के दर्शन नहीं किए हैं, तो यह अनुभव आपके जीवन को बदल सकता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास | Complete History, Facts & Significance

🛕 काशी विश्वनाथ मंदिर का सम्पूर्ण इतिहास | Kashi Vishwanath Temple History, Facts & Significance


🌄 परिचय: काशी – मोक्ष की नगरी

काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी का स्वर्ण शिखर और गंगा घाट का दृश्य

Kashi Vishwanath Temple भारत के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और 12 ज्योतिर्लिंगों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

यह मंदिर Varanasi में गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है। काशी को “अविमुक्त क्षेत्र” कहा जाता है, जिसका अर्थ है—ऐसी जगह जिसे भगवान शिव कभी नहीं छोड़ते।

हिंदू मान्यता के अनुसार, काशी में मृत्यु होने पर व्यक्ति को मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त होती है। यही कारण है कि यह स्थान हजारों वर्षों से आस्था का केंद्र बना हुआ है।


📜 पौराणिक इतिहास (Mythological Background)

हिंदू धर्मग्रंथों में काशी का वर्णन अत्यंत प्राचीन और दिव्य बताया गया है।

  • स्कंद पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने काशी को अपनी प्रिय नगरी बनाया
  • माना जाता है कि यहाँ शिव स्वयं ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए
  • काशी को “अनादि” कहा गया है, अर्थात इसका कोई आरंभ नहीं

एक मान्यता के अनुसार:
👉 जब सृष्टि का निर्माण हुआ, तब भगवान शिव ने काशी को पृथ्वी पर स्थापित किया

इसी कारण इसे “शिव की नगरी” कहा जाता है।

👉अगर आप भगवान शिव से जुड़े अन्य स्तोत्र पढ़ना चाहते हैं, तो शिव चालीसा जरूर पढ़ें।


🏛️ ऐतिहासिक प्रमाण और प्राचीन उल्लेख

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाराणसी मंदिर का आधुनिक दृश्य

काशी विश्वनाथ मंदिर का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है:

  • ऋग्वेद और अथर्ववेद में काशी क्षेत्र का वर्णन
  • महाभारत में काशी को महत्वपूर्ण तीर्थ बताया गया है
  • स्कंद पुराण (काशी खंड) में मंदिर का विस्तृत वर्णन

इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर हजारों वर्षों से अस्तित्व में है, हालांकि इसका वर्तमान स्वरूप कई बार बदल चुका है।

👉भगवान शिव के सभी नामों की जानकारी के लिए शिव जी के 108 नाम भी जरूर पढ़ें।


⚔️ मध्यकालीन आक्रमण और पुनर्निर्माण

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते श्रद्धालु


वाराणसी गंगा घाट का सुंदर दृश्य और आध्यात्मिक वातावरण


काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास संघर्षों से भी भरा हुआ है।

🏹 प्रमुख घटनाएं:

  • 1194: मोहम्मद गोरी के सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा मंदिर नष्ट किया गया
  • इसके बाद कई बार मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ
  • 1669: मुगल शासक Aurangzeb ने मंदिर को गिराकर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई

👉 इसके बावजूद, भक्तों की आस्था कभी कम नहीं हुई


👑 अहिल्याबाई होल्कर द्वारा पुनर्निर्माण (1780)

आधुनिक काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण Ahilyabai Holkar ने 1780 में कराया।

उन्होंने मंदिर को वर्तमान स्थान पर पुनः स्थापित किया और इसे भव्य रूप दिया।

👉 यह पुनर्निर्माण हिंदू इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।


🏗️ आधुनिक काल और काशी कॉरिडोर

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर वाराणसी मंदिर का आधुनिक दृश्य

हाल के वर्षों में काशी विश्वनाथ मंदिर का विस्तार किया गया जिसे काशी विश्वनाथ कॉरिडोर कहा जाता है।

👉 इस परियोजना का उद्घाटन Narendra Modi द्वारा 2021 में किया गया

इससे:

  • मंदिर का क्षेत्रफल बढ़ा
  • गंगा घाट से सीधा संपर्क बना
  • श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बेहतर हुईं


🔱 धार्मिक महत्व (Religious Importance)

काशी विश्वनाथ मंदिर का महत्व हिंदू धर्म में अत्यंत उच्च है:

  • यह 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख है
  • “विश्वनाथ” का अर्थ है — “संपूर्ण विश्व के स्वामी”
  • यहाँ भगवान शिव स्वयं निवास करते हैं

👉 मान्यता है: जो व्यक्ति यहाँ दर्शन करता है, उसे जीवन के पापों से मुक्ति मिलती है


🌊 गंगा और काशी का आध्यात्मिक संबंध

वाराणसी गंगा घाट पर शाम की गंगा आरती का पवित्र दृश्य

काशी विश्वनाथ मंदिर गंगा नदी के पास स्थित है, और यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

👉 परंपरा के अनुसार:

  • पहले गंगा स्नान
  • फिर भगवान शिव के दर्शन

यह क्रम आत्मा की शुद्धि और मोक्ष का मार्ग माना जाता है।

👉 गंगा की महिमा और आरती जानने के लिए गंगा आरती भी पढ़ें।


🎉 प्रमुख त्योहार और उत्सव

  • 🕉️ महाशिवरात्रि (सबसे बड़ा उत्सव)
  • 🌿 सावन महीना (विशेष पूजन)
  • 🔥 देव दीपावली
  • 📿 श्रावण सोमवार

इन अवसरों पर लाखों श्रद्धालु काशी आते हैं।

👉 महाशिवरात्रि के बारे में विस्तार से जानने के लिए महाशिवरात्रि व्रत कथा पढ़ें।


🧭 कैसे पहुंचे (Travel Guide)

  • ✈️ लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट (वाराणसी)
  • 🚆 वाराणसी जंक्शन
  • 🛣️ सड़क मार्ग से सभी प्रमुख शहर जुड़े हैं


⚠️ महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • काशी दुनिया के सबसे पुराने बसे शहरों में से एक है
  • मंदिर का वर्तमान ढांचा 18वीं शताब्दी का है
  • ज्ञानवापी परिसर इसके पास स्थित है
  • यह भारत का प्रमुख तीर्थ स्थल है


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

1. काशी विश्वनाथ मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।


2. मंदिर का निर्माण किसने कराया?

वर्तमान मंदिर का निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने 1780 में कराया।


3. काशी को मोक्ष की नगरी क्यों कहा जाता है?

मान्यता है कि यहाँ मृत्यु होने पर आत्मा को मुक्ति मिलती है।


4. दर्शन का सबसे अच्छा समय क्या है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है।

👉 अन्य प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानने के लिए अयोध्या राम मंदिर का इतिहास भी पढ़ें।


🔔 निष्कर्ष (Conclusion)

काशी विश्वनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम है।

यह मंदिर हजारों वर्षों की परंपरा, संघर्ष और भक्ति का प्रतीक है।
👉 यहाँ आकर व्यक्ति न केवल भगवान शिव के दर्शन करता है, बल्कि अपने जीवन का एक नया अर्थ भी पाता है।


श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली (108 Names of Lord Brahma) | पाठ विधि, लाभ और सम्पूर्ण जानकारी

श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली भगवान ब्रह्मा के 108 नामों का पवित्र स्तोत्र

Sri Brahma Ashtottara Shatanamavali 
श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली


ओं ब्रह्मणे नमः ।
ओं गायत्रीपतये नमः ।
ओं सावित्रीपतये नमः ।
ओं सरस्वतीपतये नमः ।
ओं प्रजापतये नमः ।
ओं हिरण्यगर्भाय नमः ।
ओं कमण्डलुधराय नमः ।
ओं रक्तवर्णाय नमः ।
ओं ऊर्ध्वलोकपालाय नमः । ९

ओं वरदाय नमः ।
ओं वनमालिने नमः ।
ओं सुरश्रेष्ठाय नमः ।
ओं पितमहाय नमः ।
ओं वेदगर्भाय नमः ।
ओं चतुर्मुखाय नमः ।
ओं सृष्टिकर्त्रे नमः ।
ओं बृहस्पतये नमः ।
ओं बालरूपिणे नमः । १८

ओं सुरप्रियाय नमः ।
ओं चक्रदेवाय नमः ।
ओं भुवनाधिपाय नमः ।
ओं पुण्डरीकाक्षाय नमः ।
ओं पीताक्षाय नमः ।
ओं विजयाय नमः ।
ओं पुरुषोत्तमाय नमः ।
ओं पद्महस्ताय नमः ।
ओं तमोनुदे नमः । २७

ओं जनानन्दाय नमः ।
ओं जनप्रियाय नमः ।
ओं ब्रह्मणे नमः ।
ओं मुनये नमः ।
ओं श्रीनिवासाय नमः ।
ओं शुभङ्कराय नमः ।
ओं देवकर्त्रे नमः ।
ओं स्रष्ट्रे नमः ।
ओं विष्णवे नमः । ३६

ओं भार्गवाय नमः ।
ओं गोनर्दाय नमः ।
ओं पितामहाय नमः ।
ओं महादेवाय नमः ।
ओं राघवाय नमः ।
ओं विरिञ्चये नमः ।
ओं वाराहाय नमः ।
ओं शङ्कराय नमः ।
ओं सृचाहस्ताय नमः । ४५

ओं पद्मनेत्रे नमः ।
ओं कुशहस्ताय नमः ।
ओं गोविन्दाय नमः ।
ओं सुरेन्द्राय नमः ।
ओं पद्मतनवे नमः ।
ओं मध्वक्षाय नमः ।
ओं कनकप्रभाय नमः ।
ओं अन्नदात्रे नमः ।
ओं शम्भवे नमः । ५४

ओं पौलस्त्याय नमः ।
ओं हंसवाहनाय नमः ।
ओं वसिष्ठाय नमः ।
ओं नारदाय नमः ।
ओं श्रुतिदात्रे नमः ।
ओं यजुषां पतये नमः ।
ओं मधुप्रियाय नमः ।
ओं नारायणाय नमः ।
ओं द्विजप्रियाय नमः । ६३

ओं ब्रह्मगर्भाय नमः ।
ओं सुतप्रियाय नमः ।
ओं महारूपाय नमः ।
ओं सुरूपाय नमः ।
ओं विश्वकर्मणे नमः ।
ओं जनाध्यक्षाय नमः ।
ओं देवाध्यक्षाय नमः ।
ओं गङ्गाधराय नमः ।
ओं जलदाय नमः । ७२


ओं त्रिपुरारये नमः ।
ओं त्रिलोचनाय नमः ।
ओं वधनाशनाय नमः ।
ओं शौरये नमः ।
ओं चक्रधारकाय नमः ।
ओं विरूपाक्षाय नमः ।
ओं गौतमाय नमः ।
ओं माल्यवते नमः ।
ओं द्विजेन्द्राय नमः । ८१

ओं दिवानाथाय नमः ।
ओं पुरन्दराय नमः ।
ओं हंसबाहवे नमः ।
ओं गरुडप्रियाय नमः ।
ओं महायक्षाय नमः ।
ओं सुयज्ञाय नमः ।
ओं शुक्लवर्णाय नमः ।
ओं पद्मबोधकाय नमः ।
ओं लिङ्गिने नमः । ९०

ओं उमापतये नमः ।
ओं विनायकाय नमः ।
ओं धनाधिपाय नमः ।
ओं वासुकये नमः ।
ओं युगाध्यक्षाय नमः ।
ओं त्रिराज्याय नमः ।
ओं सुभोगाय नमः ।
ओं तक्षकाय नमः ।
ओं पापहर्त्रे नमः । ९९

ओं सुदर्शनाय नमः ।
ओं महावीराय नमः ।
ओं दुर्गनाशनाय नमः ।
ओं पद्मगृहाय नमः ।
ओं मृगलाञ्छनाय नमः ।
ओं वेदरूपिणे नमः ।
ओं अक्षमालाधराय नमः ।
ओं ब्राह्मणप्रियाय नमः ।
ओं विधये नमः । १०८

इति श्री ब्रह्माष्टोत्तरशतनामावली ॥

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावली (108 नाम) | Baglamukhi Ashtottara Shatanamavali 108 name

श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावली मां बगलामुखी की पीले आभा वाली दिव्य छवि


Sri Bagalamukhi Ashtottara Shatanamavali
 श्री बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामावली 

ओं ब्रह्मास्त्ररूपिण्यै नमः ।
ओं देव्यै नमः ।
ओं मात्रे नमः ।
ओं श्रीबगलामुख्यै नमः ।
ओं चिच्छक्त्यै नमः ।
ओं ज्ञानरूपायै नमः ।
ओं ब्रह्मानन्दप्रदायिन्यै नमः ।
ओं महाविद्यायै नमः ।
ओं महालक्ष्म्यै नमः । ९

ओं श्रीमत्त्रिपुरसुन्दर्यै नमः ।
ओं भुवनेश्यै नमः ।
ओं जगन्मात्रे नमः ।
ओं पार्वत्यै नमः ।
ओं सर्वमङ्गलायै नमः ।
ओं ललितायै नमः ।
ओं भैरव्यै नमः ।
ओं शान्तायै नमः ।
ओं अन्नपूर्णायै नमः । १८

ओं कुलेश्वर्यै नमः ।
ओं वाराह्यै नमः ।
ओं छिन्नमस्तायै नमः ।
ओं तारायै नमः ।
ओं काल्यै नमः ।
ओं सरस्वत्यै नमः ।
ओं जगत्पूज्यायै नमः ।
ओं महामायायै नमः ।
ओं कामेश्यै नमः । २७

ओं भगमालिन्यै नमः ।
ओं दक्षपुत्र्यै नमः ।
ओं शिवाङ्कस्थायै नमः ।
ओं शिवरूपायै नमः ।
ओं शिवप्रियायै नमः ।
ओं सर्वसम्पत्करीदेव्यै नमः ।
ओं सर्वलोकवशङ्कर्यै नमः ।
ओं वेदविद्यायै नमः ।
ओं महापूज्यायै नमः । ३६

ओं भक्ताद्वेष्यै नमः ।
ओं भयङ्कर्यै नमः ।
ओं स्तम्भरूपायै नमः ।
ओं स्तम्भिन्यै नमः ।
ओं दुष्टस्तम्भनकारिण्यै नमः ।
ओं भक्तप्रियायै नमः ।
ओं महाभोगायै नमः ।
ओं श्रीविद्यायै नमः ।
ओं ललिताम्बिकायै नमः । ४५

ओं मैनापुत्र्यै नमः ।
ओं शिवानन्दायै नमः ।
ओं मातङ्ग्यै नमः ।
ओं भुवनेश्वर्यै नमः ।
ओं नारसिंह्यै नमः ।
ओं नरेन्द्रायै नमः ।
ओं नृपाराध्यायै नमः ।
ओं नरोत्तमायै नमः ।
ओं नागिन्यै नमः । ५४

ओं नागपुत्र्यै नमः ।
ओं नगराजसुतायै नमः ।
ओं उमायै नमः ।
ओं पीताम्बायै नमः ।
ओं पीतपुष्पायै नमः ।
ओं पीतवस्त्रप्रियायै नमः ।
ओं शुभायै नमः ।
ओं पीतगन्धप्रियायै नमः ।
ओं रामायै नमः । ६३


ओं पीतरत्नार्चितायै नमः ।
ओं शिवायै नमः ।
ओं अर्धचन्द्रधरीदेव्यै नमः ।
ओं गदामुद्गरधारिण्यै नमः ।
ओं सावित्र्यै नमः ।
ओं त्रिपदायै नमः ।
ओं शुद्धायै नमः ।
ओं सद्योरागविवर्धिन्यै नमः ।
ओं विष्णुरूपायै नमः । ७२

ओं जगन्मोहायै नमः ।
ओं ब्रह्मरूपायै नमः ।
ओं हरिप्रियायै नमः ।
ओं रुद्ररूपायै नमः ।
ओं रुद्रशक्त्यै नमः ।
ओं चिन्मय्यै नमः ।
ओं भक्तवत्सलायै नमः ।
ओं लोकमात्रे नमः ।
ओं शिवायै नमः । ८१

ओं सन्ध्यायै नमः ।
ओं शिवपूजनतत्परायै नमः ।
ओं धनाध्यक्षायै नमः ।
ओं धनेश्यै नमः ।
ओं धर्मदायै नमः ।
ओं धनदायै नमः ।
ओं धनायै नमः ।
ओं चण्डदर्पहरीदेव्यै नमः ।
ओं शुम्भासुरनिबर्हिण्यै नमः । ९०

ओं राजराजेश्वरीदेव्यै नमः ।
ओं महिषासुरमर्दिन्यै नमः ।
ओं मधुकैटभहन्त्र्यै नमः ।
ओं रक्तबीजविनाशिन्यै नमः ।
ओं धूम्राक्षदैत्यहन्त्र्यै नमः ।
ओं भण्डासुरविनाशिन्यै नमः ।
ओं रेणुपुत्र्यै नमः ।
ओं महामायायै नमः ।
ओं भ्रामर्यै नमः । ९९

ओं भ्रमराम्बिकायै नमः ।
ओं ज्वालामुख्यै नमः ।
ओं भद्रकाल्यै नमः ।
ओं शत्रुनाशिन्यै नमः ।
ओं इन्द्राण्यै नमः ।
ओं इन्द्रपूज्यायै नमः ।
ओं गुहमात्रे नमः ।
ओं गुणेश्वर्यै नमः ।
ओं वज्रपाशधरा देव्यै नमः । १०८

ओं जिह्वाधारिण्यै नमः ।
ओं मुद्गरधारिण्यै नमः ।
ओं भक्तानन्दकरी देव्यै नमः ।
ओं बगलापरमेश्वर्यै नमः । ११२

इति श्री बगला अष्टोत्तरशतनामावली ॥