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Ashadha Purnima कब हैं आषाढ़ पूर्णिमा 2025?

कब हैं आषाढ़ पूर्णिमा 2025? जानें गोपद्म व्रत व पूजा की विधि



कब हैं आषाढ़ पूर्णिमा 2025? जानें गोपद्म व्रत व पूजा की विधिवैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है लेकिन आषाढ़ माह की पूर्णिमा और भी खास होती है। आषाढ़ पूर्णिमा (Ashaad Purnima) को ही गुरु पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है साथ ही इस दिन गोपद्म व्रत भी रखा जाता है। इस पूर्णिमा को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। आइये जानते हैं आषाढ़ पूर्णिमा के महत्व व व्रत विधि के बारे में।

कब है आषाढ़ पूर्णिमा 2025 व गोपद्म व्रत


साल 2025 में आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि 10 जुलाई 2025 है।

जुलाई 10, 2025, बृहस्पतिवार (आषाढ़ पूर्णिमा व्रत)

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 10 जुलाई, रात 01:36 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 11 जुलाई, रात 02:06 बजे तक

आषाढ़ पूर्णिमा का महत्व


हिंदूओं में पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह का नामकरण पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा जिस नक्षत्र में विद्यमान होता है उसी के अनुसार रखा गया है। मान्यता है कि आषाढ़ माह की पूर्णिमा को चंद्रमा पूर्वाषाढ़ा या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होता है। यदि आषाढ़ मास में पूर्णिमा तिथि को चंद्रमा उत्ताराषाढ़ा नक्षत्र में रहे तो वह पूर्णिमा बहुत ही सौभाग्यशाली व पुण्य फलदायी मानी जाती है। ऐसे संयोग में दस विश्वदेवों की पूजा करने का विधान भी है।

आषाढ़ पूर्णिमा व गुरु पूर्णिमा


आषाढ़ मास की पूर्णमासी को ही गुरु पूर्णिमा भी मनाई जाती है। आषाढ़ में गुरु पूर्णिमा मनाये जाने को ओशो ने अच्छे से व्याख्यायित किया है उनका मानना है कि जिसने भी गुरु पूर्णिमा को आषाढ़ मास में चुना है इसके पिछे उसका कोई खयाल है कोई ईशारा है। क्योंकि आषाढ़ पूर्णिमा तो पूर्णिमा सी नज़र भी नहीं आती उससे सुंदर और भी पूर्णिमाएं हैं शरद पूर्णिमा है जिसका चांद बहुत सुंदर होता है लेकिन नहीं उसे नहीं चुना। इसका कारण यह है कि गुरु तो पूर्णिमा जैसा है और शिष्य है आषाढ़ जैसा। आषाढ़ में चंद्रमा बादलों से घिरा रहता है। यानि गुरु शिष्यों से घिरा है। शरद पूर्णिमा पर अकेला चांद चमकता नज़र आता है वहां गुरु ही है शिष्य है ही नहीं। जन्म-जन्मांतर के अज्ञान रूपी अंधकार स्वरूपी बादल ही शिष्य हैं जिनमें गुरु चांद की तरह अपनी चमक से अंधेरे वातावरण को चिर कर उसमें रोशनी पैदा करता है। इसलिये आषाढ़ पूर्णिमा में ही गुरु पूर्णिमा की सार्थकता है।

आषाढ़ पूर्णिमा पर गोपद्म व्रत

आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को ही गोपद्म व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि गोपद्म व्रत सभी प्रकार के सुख प्रदान करने वाला होता है।

आषाढ़ पूर्णिमा व गोपद्म व्रत पूजा की विधि


हिंदूओं के विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में विभिन्न पर्व-त्योहारों व व्रतों पर विशेष पूजा करने के विधान हैं।


शास्त्रानुसार आषाढ़ पूर्णिमा पर रखे जाने वाले गोपद्म व्रत की विशेष विधि है।


गोपद्म व्रत में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। हालांकि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार मास तक के लिये सो जाते हैं लेकिन गोपद्म व्रत के दिन उन्हीं की पूजा की जाती है।


इसके लिये व्रती को प्रात:काल उठकर स्नानादि के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिये।


व्रत के पूरे दिन भगवान श्री विष्णु में ध्यान लगाये रखना चाहिये।


उनके चतुर्भुज रूप का स्मरण करना चाहिये जिसमें वे गरूड़ पर सवार हों और संग में माता लक्ष्मी का भी ध्यान लगाना चाहिये।


समस्त देवी-देवता उनका स्तुतिगान कर रहे हैं उनकी आराधना कर रहे हैं ऐसा सोचना चाहिये।


धूप, दीप, पुष्प, गंध आदि से विधिनुसार पूजा करनी चाहिये।


भगवान श्री हरि के पूजन के पश्चात विद्वान ब्राह्मण या किसी जरूरदमंद को भोजन करवाकर सामर्थ्यनुसार दान-दक्षिणा देकर प्रसन्न करना चाहिये।

मान्यता है कि यदि पूरी श्रद्धा के साथ इस व्रत का पालन किया जाये तो इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं एवं व्रती की मनोकामना को पूर्ण करते हैं। संसार में रहते समस्त भौतिक सुखों का आनंद लेकर अंत काल में व्रती को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Phalgun Purnima फाल्गुन पूर्णिमा 2025 फाल्गुन पूर्णिमा 2025 - कब है फाल्गुन पूर्णिमा?

 फाल्गुन पूर्णिमा 2025 - कब है फाल्गुन पूर्णिमा? जानें इसका शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और व्रत कथा




फागुन जहां हिन्दू वर्ष का अंतिम महीना होता है तो फागुन पूर्णिमा वर्ष की अंतिम पूर्णिमा के साथ-साथ वर्ष का अंतिम दिन भी होती है। फागुन पूर्णिमा का धार्मिक रूप से तो महत्व है ही साथ ही सामाजिक-सांस्कृतिक नजरिये से भी बहुत महत्व है। पूर्णिमा पर उपवास भी किया जाता है जो सूर्योदय से आरंभ कर चंद्रोदय तक रखा जाता है। वहीं इस त्यौहार की सबसे खास बात यह है कि यह दिन होली पर्व का दिन होता है जिसे बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है और तमाम लकड़ियों को इकट्ठा कर सभी प्रकार की नकारात्मकताओं की होली जलाई जाती है।


2025 में कब है फाल्गुन पूर्णिमा (Falgun Purnima 2025)

2025 में फागुन पूर्णिमा व्रत 13 मार्च को रखा जायेगा। इसी दिन होलिका का दहन भी किया जायेगा। इस फागुन पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं-

मार्च 14, 2025, शुक्रवार (फाल्गुन पूर्णिमा, पूर्णिमा)

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 13 मार्च, सुबह 10:35 बजे से

पूर्णिमा तिथि समाप्त - 14 मार्च, दोपहर 12:23 बजे तक

क्या है फाल्गुन पूर्णिमा व्रत (Falgun Purnima Vrat) की विधि


मान्यता है कि फागुनी पूर्णिमा पर व्रत करने से व्रती के सारे संताप मिट जाते हैं सभी कष्टों का निवारण हो जाता है व श्रद्धालु पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। व्रती को पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय यानि चंद्रमा दिखाई देने तक उपवास रखना चाहिये। प्रत्येक मास की पूर्णिमा में उपवास व पूजा करने की भिन्न भिन्न विधियां हैं।

फाल्गुनी पूर्णिमा पर कामवासना का दाह किया जाता है ताकि निष्काम प्रेम के भाव से प्रेम का रंगीला पर्व होली मनाया जा सके। फागुन मास की पूर्णिमा बहुत ही महत्वपूर्ण होती है इसलिये हमारी राय है कि आपको विद्वान ज्योतिषाचार्यों से परामर्श अवश्य करना चाहिये।

फाल्गुन पूर्णिमा की पूजा विधि (Falgun Purnima Puja Vidhi)


फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन का पूजन किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है।


पूर्णिमा के दिन प्रातकाल उठकर स्नानादि के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके होलिका का पूजन करना चाहिए।


होलिका दहन से पूर्व अपने आसपास पानी की कुछ बूंदे अवश्य छिड़कें। इसके बाद गाय के गोबर से होलिका का निर्माण करें।


एक थाली में माला, रोली, गंध, पुष्प, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, पांच प्रकार के अनाज में गेहूं की बालियां और साथ में एक लोटा जल अवश्य रखें।


पूजा सामग्री के बाद भगवान नरसिंह की प्रार्थना करें और होलिका पर रोली, अक्षत, फूल, बताशे अर्पित करें और मौली को होलिका के चारों ओर लपेटें।


तत्पश्चात होलिका पर प्रह्लाद का नाम लेकर पुष्प अर्पित करें। भगवान नरसिंह का नाम लेते हुए 5 अनाज चढ़ाएं।


पूजा संपन्न होने के बाद होलिका दहन करें और उसकी परिक्रमा करना ना भूलें।


होलिका की अग्नि में गुलाल डालें और घर के बुजुर्गों के पैरों पर गुलाल लगाकर आशीर्वाद लें।
 
फाल्गुन पूर्णिमा व्रत की कथा (Falgun Purnima Vrat Katha)


फागुन पूर्णिमा के व्रत की वैसे तो अनेक कथाएं हैं लेकिन नारद पुराण में जो कथा दी गई है वह असुर राज हरिण्यकश्यपु की बहन राक्षसी होलिका के दहन की कथा है जो भगवान विष्णु के भक्त व हरिण्यकश्यपु के पुत्र प्रह्लाद को जलाने के लिये अग्नि स्नान करने बैठी थी लेकिन प्रभु की कृपा से होलिका स्वयं ही अग्नि में भस्म हो जाती है। इस प्रकार मान्यता है कि इस दिन लकड़ियों, उपलों आदि को इकट्ठा कर होलिका का निर्माण करना चाहिये व मंत्रोच्चार के साथ शुभ मुहूर्त में विधिपूर्वक होलिका दहन करना चाहिये। जब होलिका की अग्नि तेज होने लगे तो उसकी परिक्रमा करते हुए खुशी का उत्सव मनाना चाहिये और होलिका दहन के साथ भगवान विष्णु व भक्त प्रह्लाद का स्मरण करना चाहिये। असल में होलिका अहंकार व पापकर्मों की प्रतीक भी है इसलिये होलिका में अपने अंहकार व पापकर्मों की आहुति देकर अपने मन को भक्त प्रह्लाद की तरह भगवान के प्रति समर्पित करना चाहिये।

Rashifal 2025 राशियों के लिए वार्षिक राशिफल

Rashifal 2025: जानें सभी 12 राशियों के लिए वार्षिक राशिफल 2025!



Rashifal 2025: नया साल नई उम्मीदों और सपनों के साथ आता है, जो हमारे जीवन को नई दिशा देता है। हर साल की तरह, साल 2025 भी हमें अनगिनत मौकों और संघर्षों का मौका दे सकती है। हम आपको बताने जा रहे हैं कि नया साल आपके जीवन में क्या नया लेकर आ रहा है? जानिए साल 2025 की सभी राशियों का वार्षिक राशिफल 2025 से आपका आर्थिक राशिफल, स्वास्थ्य राशिफल, करियर राशिफल, और लव राशिफल। इसके साथ ही, हम आपको बताएंगे कि इस साल में कुछ खास टिप्स, यानी क्या करें और क्या न करें, जो आपको सफलता की ओर अग्रसर करेंगी। नव-वर्ष की शुरुआत में हम सभी के स्वस्थ, सुखी, और समृद्ध जीवन की कामना करते हैं।

व्यावसायिक रूप से, साल 2025 विकास और स्थिरता का वर्ष होने की ओर अग्रसर है। ग्रहों की स्थिति सकारात्मक कार्य वातावरण, स्थिर वित्त और विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विकास का संकेत देती है। व्यापार, बुनियादी ढांचे और वैश्विक संबंधों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ भारत के आर्थिक परिदृश्य में बड़ी प्रगति होगी। प्रमुख ग्रह गोचर, विशेष रूप से बृहस्पति और शनि के गोचर, उद्योगों और नीतियों को आकार देंगे।

नववर्ष 2025 आर्थिक तौर पर अच्छा रहने वाला है। साथ ही पिछले साल जो कार्य रुक गए थे उन सभी के कार्यों को गति मिलने वाली है। वहीं साल 2025 मार्च महीने के अंत में शनि ग्रह मीन राशि में और मई के मध्य में गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में गोचर करेंगे। वहीं मई 2025 में राहु-केतु भी राशि में परिवर्तन करेंगे।

वर्ष की शुरुआत अनुकूल गोचरों के साथ हो रही है, जो व्यापार और बुनियादी ढांचे के विकास में प्रभुत्व का वादा करता है। वार्षिक राशिफल 2025 (Varshik Rashifal 2025) के अनुसार, आईटी, रसायन, प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्र पहली छमाही में विकास के लिए तैयार हैं, इसके बाद वर्ष के अंत में एफएमसीजी, निर्माण और दूरसंचार में वृद्धि होगी। विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी और मुद्रा में मजबूती से देश की जीडीपी में सतत वृद्धि होने की उम्मीद है।

अर्थशास्त्र से परे, सामाजिक और भू-राजनीतिक कारक वैश्विक मंच पर भारत की कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशाल अंतरिक्ष कार्यक्रम, वैज्ञानिक नवाचार और फार्मास्यूटिकल्स में प्रगति ऊंचाई पर है, जो भारत को तकनीकी नवाचार में सबसे आगे ले जा रही है। इसके अतिरिक्त, खेल क्षेत्र में पुनरुत्थान की उम्मीद है, जिसमें खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए तैयार हैं।

2025 राशिफल के अनुसार, भू-राजनीतिक रूप से, भारत की कूटनीतिक शक्ति विश्व मंच पर अधिक मुखर और रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ सामने आएगी। पड़ोसी देशों से चुनौतियों के बावजूद, भारत को कुशल कूटनीति और दृढ़ता के साथ भू-राजनीतिक जटिलताओं से निपटने का अनुमान है। अंतर्राष्ट्रीय निर्णय लेने वाले मंचों पर देश का प्रभाव उल्लेखनीय रूप से बढ़ने वाला है।

व्यक्तिगत स्तर पर, साल 2025 नागरिकों के बीच भावनात्मक संवेदनशीलता और देशभक्ति की अवधि का प्रतीक है। हालाँकि वर्षा परिवर्तनशीलता के कारण विशेषकर कृषि में चुनौतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, सरकारी समर्थन और नियम प्रतिकूल प्रभावों को कम कर देंगे। धार्मिक तनाव कम होने की उम्मीद है, जिससे अधिक सामंजस्यपूर्ण समाज का मार्ग प्रशस्त होगा।

संक्षेप में, साल 2025 व्यक्तिगत और व्यावसायिक रूप से अवसरों और चुनौतियों का परिदृश्य प्रस्तुत करता है। जैसे-जैसे हम आने वाले वर्ष में आगे बढ़ेंगे, सकारात्मकता, लचीलापन और अनुकूलन क्षमता को अपनाना इसकी पूरी क्षमता को उजागर करने की कुंजी होगी। राशिफल 2025 (Rashifal 2025) के अनुसार, विकास, स्थिरता और एकता पर दृढ़ फोकस के साथ, भारत सभी के लिए प्रगति और समृद्धि से चिह्नित एक उज्जवल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

वार्षिक राशिफल 2025: सभी 12 राशियों के लिए भविष्यवाणियां


साल 2025 में कई बड़े बदलाव होने वाले हैं जो सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव दिखा सकते हैं। इस साल ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति के कारण विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परिवर्तन होंगे। आइये विस्तार से जानते हैं कि क्या कहता है वार्षिक राशिफल 2025 (Rashifal 2025) और कैसे यह आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करेगा, जैसे कि आपका करियर, स्वास्थ्य, वित्त और व्यक्तिगत जीवन।

मेष राशिफल 2025 - Mesh Rashifal 2025


साल 2025 आपके लिए वादों और चुनौतियों से भरा एक साल हो सकता है। आपका गतिशील स्वभाव और साहसी भावना वाले होंगे। उतार-चढ़ाव के दौरान आपके मार्गदर्शक सितारे रहेंगे। व्यावसायिक रूप से, साल की शुरुआत उन्नति के साथ होगी, जो विकास और उन्नति के अवसर प्रदान करेगी। हालाँकि, व्यवसाय और कार्यस्थल की राजनीति में ठहराव के साथ साल के बाद के छः महीनों में, आपके धैर्य की परीक्षा ले हो सकती है। सतर्क रहें और अपने लचीलेपन के साथ आगे बढ़ें।

वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, दिल के मामले में, विवाहित मेष राशि के लोग मिलेजुले परिणामों की उम्मीद कर सकते हैं। साल के पहले 6 महीने समझ और निकटता का वादा करते हैं, लेकिन साल के बाद के छः महीनों में अशांत पानी से सावधान रहें, जहां विश्वास डगमगा सकता है। अविवाहित लोग सावधानी से चलें, क्योंकि आप रिश्ते में क्षण भर में परेशान हो सकते हैं और विश्वास संबंधी समस्याएं सामने आ सकती हैं। धैर्य और बातचीत आपके सहयोगी होंगे।

वित्तीय रूप से, आप विवेकपूर्ण निवेश और नियंत्रित खर्चों के साथ सही स्थान पर होंगे। मेष वार्षिक राशिफल 2025 (mesh rashifal 2025) के अनुसार, नौकरी चाहने वालों को पहले छह महीनों में सफलता मिल सकती है, जबकि उद्यमियों को बाधाओं का सामना करना पड़ता है लेकिन आप मजबूत होकर उभर सकते हैं। अपना ध्यान केंद्रित रखें और स्थायी लाभ के लिए जल्दी निर्णय लेने से बचें।

आपका परिवार आपकी देखभाल की मांग करता है। पारिवारिक गतिशीलता में रुकावट आपके रिश्तों को चुनौती दे सकता है, लेकिन साल के बाद के छ महीनों में सामंजस्य की प्रतीक्षा हो सकती है। स्वास्थ्य की दृष्टि से, स्वयं की देखभाल को प्राथमिकता दें। मानसिक भलाई सर्वोपरि है। सचेतनता के साथ चिंता का मुकाबला करें और सकारात्मक बदलावों में सांत्वना तलाशें।

जैसे ही ग्रह आपके पक्ष में हो, साहस और बुद्धिमत्ता के साथ परिवर्तन को स्वीकार करें। साल 2025 में आपकी यात्रा में परीक्षाएँ और विजय दोनों हैं।

उपाय: प्रत्येक बुधवार को मूंग की दाल खाएं और यथासंभव दान करें।

वृषभ राशिफल 2025 - Vrishabh Rashifal 2025


साल 2025 में, वृषभ राशि के जातक विकास की एक परिवर्तनकारी यात्रा की उम्मीद कर सकते हैं। आप अपनी ईमानदारी और कड़ी मेहनत के लिए जाने जाते हैं हालाँकि आप लोगों को ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जो आपके धैर्य की परीक्षा लेंगी लेकिन अंततः आपके चरित्र को मजबूत करेंगी। साल की शुरुआत स्थिरता के साथ होगी, साल के बाद के छः महीने में विस्तार और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा।

रिश्तों में, इस साल वृषभ राशि वालों को प्यार और रोमांस खूब मिलेगा। विशेष रूप से विवाहित जोड़ों के लिए जो अंतरंग क्षणों को संजोएंगे और अपने रिश्ते को मजबूत करेंगे। अविवाहित जोड़ों को उन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है जिनके लिए विश्वास और समझ की आवश्यकता होती है, जबकि अविवाहित लोगों को नए रिश्तों में सावधानी से आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।

वृषभ वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, करियर के लिहाज से आप नई जिम्मेदारियों और अवसरों के साथ आगे बढ़ेंगे, हालांकि आपके सहकर्मियों या प्रतिस्पर्धियों से आपको बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। व्यावसायिक उद्यमों के लिए धैर्य और सतत विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है, वर्ष की दूसरी छमाही में सफलता की संभावना है।

आर्थिक रूप से, वृषभ राशि के लोग स्थिरता और विकास की उम्मीद कर सकते हैं, खासकर निवेश और मुनाफे में। हालाँकि, पहली छमाही में अचानक आने वाले खर्चों से निपटने के लिए सावधानीपूर्वक बजट बनाने की सलाह दी जाती है। वृषभ वार्षिक राशिफल 2025(Vrishabh rashifal 2025) के अनुसार, आपको पारिवारिक जीवन में तनाव का सामना करना पड़ सकता है, खासकर घरेलू माहौल में तनाव और भावनात्मक असुरक्षा व्याप्त रहेगी।

स्वास्थ्य की दृष्टि से, शारीरिक स्वास्थ्य आशाजनक है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य मूड में बदलाव और अधिक सोचने से प्रभावित हो सकता है, खासकर साल के पहले के छह महीनों में। आध्यात्मिक अभ्यास और आत्म-देखभाल से जुड़े उपाय पूरे वर्ष संतुलन और लचीलापन प्रदान कर सकते हैं।

ग्रहों का गोचर प्रेम, करियर, वित्त और स्वास्थ्य के लिए अनुकूल अवधियों को उजागर करता है, जो विकास और स्थिरता के अवसर प्रदान करता है। कुल मिलाकर, साल 2025 वृषभ राशि वालों के लिए चुनौतियाँ और विजय प्रस्तुत करता है, जिसमें सफलतापूर्वक नेविगेट करने के लिए लचीलापन, धैर्य और आत्म-देखभाल की आवश्यकता होती है।

उपाय: अपने लिविंग रूम में वास्तु के पौधे और फूल रखें।

मिथुन राशिफल 2025 - Mithun Rashifal 2025

वर्ष 2025 मिथुन राशि के जातकों के लिए जीवन के विभिन्न पहलुओं में महत्वपूर्ण वादे और चुनौतियाँ लेकर आया है। अपने छिपे हुए आकर्षण और संचार कौशल के साथ, मिथुन राशि वाले वर्ष को आशावाद और अनुकूलनशीलता के साथ आगे बढ़ाएंगे।

करियर के मामले में आप पेशेवर रूप में चमकेंगे। मिथुन वार्षिक राशिफल 2025(Mithun rashifal 2025) के अनुसार, आप अपने क्षेत्र में पहचान और जिम्मेदारी अर्जित करेंगे। नौकरी की चाहने रखने वालों को सफलता मिल सकती है, जबकि व्यावसायिक उद्यम फल-फूलेंगे, खासकर साल के बाद के छः महीनों में। आपकी दृढ़ता रणनीतिक योजना में निहित है। वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, ग्रहों के गोचर से संकेत मिलता है कि यह साल स्थिरता और विकास के पक्ष में है।

मिथुन वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, रोमांटिक मोर्चे पर, आपका अपने पार्टनर के साथ के संबंधों में गहराई आएगी। हालाँकि कुछ बाधाएँ आ सकती हैं, खासकर साल की पहली छमाही में। चुनौतियों पर काबू पाने और रिश्तों को बनाये रखने के लिए स्पष्ट बातचीत और धैर्य आवश्यक होगा।

आर्थिक रूप से, मिथुन राशि वालों को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है, साल की पहली छमाही में खर्चों के प्रबंधन में कुछ चुनौतियाँ आ सकती हैं। हालाँकि, दूसरी छमाही बढ़ी हुई आय और स्थिरता के अवसर लाती है, खासकर बुद्धिमान निवेश और रणनीतिक योजना के माध्यम से।

पारिवारिक गतिशीलता में साल के पहले भाग में कुछ उथल-पुथल हो सकती है। वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, आप पर गलत संचार और भावनात्मक असुरक्षा हावी रहेगी। हालाँकि, समझदारी और धैर्य की दिशा में ठोस प्रयास से वर्ष के साल के बाद के छः महीने में आपके लिए अधिक सौहार्दपूर्ण वातावरण बनेगा।

स्वास्थ्य की दृष्टि से मिथुन राशि वालों को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत पर ध्यान देना चाहिए। हालाँकि छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषकर पहली छमाही में, संतुलित जीवनशैली अपनाने और सचेत रहने से कल्याण में योगदान मिलेगा।

मिथुन वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, पूरे वर्ष, आध्यात्मिक प्रथाओं और धर्मार्थ कार्यों जैसे उपचारात्मक उपायों का पालन, मिथुन राशि के जातकों को समर्थन और मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे आपको चुनौतियों से निपटने और विकास के अवसरों को अपनाने में मदद मिलेगी। 

उपाय: प्रतिदिन गाय को हरी घास खिलाना शुरू करें।

कर्क राशिफल 2025 - Kark Rashifal 2025


साल 2025 में, कर्क राशि के जातक व्यक्तिगत अहसास और बाहरी संघर्षों से भरे विरोधाभासों से भरे साल से गुजरेंगे। वर्ष की शुरुआत आशाजनक कैरियर उन्नति और वित्तीय लाभ के साथ होती है, विशेष रूप से पहली छमाही में, क्योंकि स्थिरता और विस्तार पेशेवर पथ को परिभाषित करते हैं। हालाँकि, साल के बाद के छः महीने में पारस्परिक तनाव उत्पन्न हो सकता है, विशेषकर पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में।

कर्क वार्षिक राशिफल 2025(Kark rashifal 2025) के अनुसार, करियर के लिहाज से, कर्क राशि वालों को उन्नति के अवसरों के साथ पूरे 2025 तक विकास और स्थिरता का अनुभव होगा। हालाँकि सीनियर्स के साथ टकराव उत्पन्न हो सकता है, लेकिन ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए खुला दिमाग बनाए रखना महत्वपूर्ण है। व्यावसायिक उद्यम फल-फूलेंगे, विशेषकर होस्पेटिलिटी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में। छात्र विशेष रूप से चिकित्सा और कानून जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करेंगे, हालांकि नैतिक आचरण आवश्यक है।

वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, आपको प्रेम और रिश्तों में अशांति का सामना करना पड़ सकता है, विवाहित जोड़ों को गलतफहमी और भावनात्मक दूरी का अनुभव हो सकता है। विवाह के इच्छुक अविवाहित लोगों को अनुकूल संभावनाएं मिलेंगी, विशेषकर साल के बाद के छः महीने में। साल के बाद के छः महीने में स्थिरता में सुधार के साथ, अविवाहित जोड़े उतार-चढ़ाव का सामना करेंगे।

आर्थिक रूप से, साल की शुरुआत समृद्धि के साथ होगी, लेकिन साल के बाद के छः महीने में खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे सावधानीपूर्वक बजट बनाने की आवश्यकता होगी। सट्टा उद्यमों के बजाय दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान देते हुए, निवेश सावधानी से किया जाना चाहिए।

वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, पारिवारिक गतिशीलता तनावपूर्ण हो सकती है, विशेष रूप से ससुराल वालों और भाई-बहनों के साथ संबंधों में तनाव स्पष्ट होगा। हालाँकि, संघर्षों को समझने और सुलझाने के प्रयासों से सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। स्वास्थ्य की दृष्टि से, कर्क राशि वाले शारीरिक रूप से स्वस्थ रहेंगे, हालाँकि मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है, विशेषकर तनाव के दौरान।

ग्रह गोचर जनवरी और दिसंबर में करियर में उन्नति के लिए शुभ समय का संकेत देते हैं, जबकि मई और जून वित्तीय लाभ के लिए अनुकूल हैं। पारिवारिक सौहार्द सितंबर और अक्टूबर में चरम पर हो सकते हैं, जनवरी, जुलाई और अगस्त में स्वास्थ्य मजबूत रहने की उम्मीद है। 

उपाय: रोज सुबह सौंफ खाना शुरू करें।

यह भी पढ़ें: साल 2025 में विवाह के लिए शुभ मांगलिक मुहूर्त

सिंह राशिफल 2025 - Singh Rashifal 2025

साल 2025 के लिए सिंह वार्षिक राशिफल इस उग्र संकेत के तहत पैदा हुए लोगों के लिए विकास, स्थिरता और अवसरों से भरे वर्ष का वादा करता है। सूर्य द्वारा शासित, सिंह राशि वाले अपने करिश्मे, आत्मविश्वास और जुनून के लिए जाने जाते हैं।

कैरियर की बात करें तो, नौकरी और व्यवसाय दोनों में आप महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद कर सकते हैं। सिंह वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, वर्ष की दूसरी छमाही विस्तार और मान्यता के लिए विशेष रूप से अनुकूल है। हालाँकि, मेहनती बने रहना और आत्मसंतुष्ट न होना आवश्यक है।

वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, प्यार और रिश्तों के मामले में सिंह राशि के जातकों को स्थिरता का अनुभव होगा, लेकिन भावनाओं को व्यक्त करने और रोमांस बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर विवाहित जातकों के लिए। अविवाहित जोड़े एक साथ आनंद और रोमांच पाएंगे, जबकि पिछले अनुभवों के कारण प्रतिबद्ध होने में संकोच कर सकते हैं।

सिंह वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, आर्थिक रूप से, सिंह राशि वाले निवेश और विकास के अवसरों के साथ स्थिर आय प्रवाह की उम्मीद कर सकते हैं। हालांकि साल कुछ फिजूलखर्ची ला सकता है, लेकिन खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। साझेदारी वाले व्यवसायों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए खुले संचार और सावधानीपूर्वक निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।

सिंह वार्षिक राशिफल 2025(Singh rashifal 2025) के अनुसार, इस साल आपका पारिवारिक जीवन सौहार्दपूर्ण रहेगा। छोटे-मोटे झगड़े आसानी से सुलझ जाएंगे, खासकर साल के दूसरे भाग में। स्वास्थ्य की दृष्टि से, सिंह राशि वाले मजबूत शारीरिक स्वास्थ्य का आनंद लेंगे। मानसिक स्वास्थ्य सकारात्मक रहेगा, कभी-कभार मूड में बदलाव और अत्यधिक सोचने को उपचार और आत्म-देखभाल के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, साल 2025 सिंह राशि के जातकों के लिए आशाजनक है, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं में विकास, स्थिरता और व्यक्तिगत पूर्ति के अवसर प्रदान कर सकता है।

उपाय: प्रत्येक शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा करें और खीर का भोग लगाएं।

कन्या राशिफल 2025 - Kanya Rashifal 2025


साल 2025 में कन्या वार्षिक राशिफल आपके लिए व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के अवसरों से भरे वर्ष का वादा करता है। साथ ही कुछ चुनौतियाँ भी हैं जिन्हें धैर्य और दृढ़ता से दूर किया जा सकता है। कन्या राशि के जातक, जो अपनी रचनात्मकता और बारीकियों पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं, उन्हें अपने प्रयासों में सफलता मिलेगी, खासकर करियर और वित्त में।

करियर के लिहाज से, आपको नौकरी और व्यवसाय दोनों क्षेत्रों में उन्नति और विस्तार के अवसरों के साथ महत्वपूर्ण वृद्धि देखी जाएगी। कन्या वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, आपको कार्यालय की राजनीति में कूटनीतिक तरीके से आगे बढ़ने और अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता होगी, लेकिन पुरस्कार इसके लायक होंगे। इस साल 2025 में छात्र अपनी पढ़ाई में उत्कृष्टता प्राप्त करेंगे। कन्या वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, आपको परीक्षा और प्रवेश में अनुकूल परिणाम मिलेंगे।

प्रेम और रिश्तों के मामले में, विवाहित कन्या राशि वालों को अपने पार्टनर से समर्थन मिलेगा। कन्या वार्षिक राशिफल 2025(Kanya rashifal 2025) के अनुसार, हालांकि साल के दूसरे भाग में गलतफहमी से बचने के लिए आपको अपनी वाणी पर काम करने की आवश्यकता हो सकती है। अविवाहित जोड़े इस आनंदमय वर्ष का आनंद लेंगे, जिसमें घनिष्ठता बढ़ेगी और आपके रिश्ते को अगले स्तर पर ले जाने की संभावना होगी। हालाँकि, शादी करने की योजना बना रहे अविवाहित लोगों को सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि बाधाएँ आ सकती हैं।

वित्तीय रूप से, कन्या राशि वालों को धन संचय और न्यूनतम खर्च के अवसरों के साथ स्थिरता और विकास का अनुभव होगा। अतीत में किए गए निवेश से लाभ मिलेगा और संपत्ति में निवेश के लिए यह अनुकूल समय है। जीवनसाथी के साथ साझेदारी वाले व्यवसाय विशेष लाभदायक रहेंगे।

साल की पहली छमाही में पारिवारिक जीवन में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर भाई-बहनों के साथ, लेकिन दूसरी छमाही में झगड़े सुलझ जाएंगे। स्वास्थ्य की दृष्टि से, कन्या राशि वालों को अपनी भलाई पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता हो सकती है, विशेष रूप से ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने और तनाव को प्रबंधित करने में।

कुल मिलाकर, कन्या राशि के जातक जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफलता के अवसरों के साथ, एक संतुष्टिदायक वर्ष की आशा कर सकते हैं। उपायों का पालन करने और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने से आने वाली किसी भी चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी, जिससे एक समृद्ध और सामंजस्यपूर्ण 2025 सुनिश्चित होगा। 

उपाय: अपने घर के ईशान कोण में केले का पेड़ लगाएं और उसे प्रतिदिन जल दें।

तुला राशिफल 2025 - Tula Rashifal 2025

साल 2025 तुला राशि वालों के लिए जीवन के विभिन्न पहलुओं में चुनौतियों और अवसरों का मिश्रण लेकर आया है। करियर और पेशेवर प्रयासों में, पहली छमाही पहचान और उन्नति का वादा करती है, खासकर रचनात्मक और तकनीकी क्षेत्रों में। कार्यभार बढ़ने के बावजूद आपको परिश्रम से सफलता मिलेगी। व्यावसायिक उद्यमों को शुरुआती स्थिरता का सामना करना पड़ता है, लेकिन बाद के छः महीनों में वे फलते-फूलते हैं, खासकर ऑटोमोटिव, हॉस्पिटालिटी और फैशन क्षेत्रों में। विद्यार्थियों के लिए, प्रारंभिक बाधाओं के बाद सफलता इंतज़ार कर रही है।

प्यार और रिश्तों में, विवाहित तुला राशि वालों के लिए इस वर्ष की शुरुआत चुनौतियों से होती है, लेकिन प्रयास आपको वर्ष के मध्य तक सुलह और सद्भाव की ओर ले जाते हैं। अविवाहित तुला राशि वालों को शुरुआती उथल-पुथल का सामना करना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें स्थायी रिश्ते बनाए रखने के लिए धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है। अप्रैल के बाद रोमांटिक संभावनाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।

नौकरी क्षेत्र में लाभ और संभावित व्यावसायिक लाभ के बावजूद वित्तीय रूप से सावधानीपूर्वक खर्च करने की सलाह दी जाती है। तुला वार्षिक राशिफल 2025(Tularashifal 2025) के अनुसार, स्थिर विकल्पों को प्राथमिकता देते हुए निवेश जोखिमों को कम किया जाना चाहिए। पारिवारिक जीवन में शुरुआती संघर्षों के बाद आनंदमय पुनर्मिलन और साझा अनुभव सामने आते हैं।

ज्योतिषीय रूप से, ग्रहों का गोचर प्रत्येक पहलू को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है, मार्च/अप्रैल में करियर के लिए अनुकूल अवधि और फरवरी/अक्टूबर में पारिवारिक सामंजस्य होता है। तुला वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, मार्च/नवंबर में स्वास्थ्य चरम पर होता है। 

उपाय: चंदन का एक टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें।

वृश्चिक राशिफल 2025- Vrishchik Rashifal 2025

आप साल 2025 के आशाजनक वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, इसलिए सभी वृश्चिक राशि वालों को शुभकामनाएँ। वृश्चिक वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, तीव्रता और परिवर्तन के संकेत के तहत जन्मे, वृश्चिक राशि के लोग एक शक्तिशाली आभा प्रदर्शित करते हैं जो ध्यान आकर्षित करती है। अपने अंतर्निहित जुनून और सहज स्वभाव के साथ, वृश्चिक राशि के लोग अपने सत्तारूढ़ ग्रह मंगल के प्रभाव से निर्देशित होकर अपनी निर्भीकता और आधिकारिक व्यवहार के लिए जाने जाते हैं।

नौकरी के क्षेत्र में वृश्चिक राशि वालों के लिए, साल 2025 की शुरुआत चुनौतियों से हो सकती है, लेकिन वृश्चिक वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, साल के बाद के 6 महिने में सुधार होगा, खासकर अप्रैल के बाद। आप उल्लेखनीय वृद्धि और मान्यता की उम्मीद कर सकते हैं। साल के बाद के छः महीने विशेष रूप से अनुकूल रहेंगे। आपके व्यावसायिक उद्यम फल-फूलेंगे, स्थिर लाभ और विस्तार के अवसरों के साथ, विशेष रूप से पहली छमाही में। विशेषकर मार्च के बाद छात्रों को सफलता मिलेगी, किसी खास संस्थान में प्रवेश मिलेगा। आप प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।

वृश्चिक वार्षिक राशिफल 2025(Vrishchik rashifal 2025) के अनुसार, प्रेम के मामलों में, वृश्चिक राशि वाले जुनून और चुनौतियों के मिश्रण से गुजरेंगे। विवाहित जातक साल की शुरुआत आनंदपूर्वक करेंगे लेकिन बाद में उन्हें तनाव का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए धैर्य और संचार की आवश्यकता होगी। अविवाहित लोगों को पहले भाग में प्यार मिल सकता है, लेकिन साल के बाद के छः महीने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। रिश्तों को बनाए रखने के लिए विश्वास और संचार महत्वपूर्ण होगा।

आर्थिक रूप से, वृश्चिक राशि वालों को स्थिरता और विकास का आनंद मिलेगा। वृश्चिक वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, आपको नौकरी में वेतन वृद्धि और बोनस देखने को मिलेगा। व्यावसायिक उद्यम समृद्ध होंगे और निवेश से लाभ मिलेगा, विशेषकर साल के पहले छः महीनों में।

वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, पारिवारिक गतिशीलता को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अच्छे से बात करने से सद्भाव बहाल किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य में सुधार बनाये रखने के लिए योग और ध्यान की सलाह दी जाती है।

बृहस्पति का गोचर भाग्य और वृद्धि लाता है, जबकि शनि का प्रभाव व्यक्तिगत जीवन में चुनौतियाँ ला सकता है। राहु की चाल वित्तीय लाभ लेकिन रिश्तों में संभावित टकराव का संकेत देती है।

उपाय: अपने घर में शिव परिवार की पेंटिंग या तस्वीर रखें और अपने शयनकक्ष में लैवेंडर का पौधा या ऑर्किड रखें।


धनु वार्षिक राशिफल 2025 - Dhanu Rashifal 2025

धनु राशि वाले उत्साही और साहसी होते हैं, बृहस्पति की कृपा दृष्टि के साथ साल 2025 आपके लिए कुछ खास होने वाला है। इस वर्ष, आपके उत्साह को व्यक्तिगत और व्यावसायिक क्षेत्रों में संतुलित विकास मिल सकता है।

करियर के क्षेत्र में, यह वर्ष अवसरों के साथ शुरु हो सकता है। आपकी नौकरी की भूमिकाएँ विस्तारित हो सकती हैं। विशेष रूप से साल के लास्ट के 6 महीने में, अप्रत्याशित लाभ दे सकते हैं। कार्यस्थल की राजनीति के बावजूद, दृढ़ता से सफलता मिलती है।

प्यार और रिश्ते में ईमानदारी खास महत्व निभाएगी। विवाहित धनु राशि वालों के रिश्ते गहरे हो सकते हैं, जबकि अविवाहित लोगों को सार्थक रिश्ते मिल सकते हैं। हालाँकि असहमति उत्पन्न हो सकती है, बातचीत समझ को बढ़ावा दे सकती है और भावनात्मक संबंधों को मजबूत कर सकती है।

धनु वार्षिक राशिफल 2025 (dhanu rashifal 2025) के अनुसार, आपके जीवन में आर्थिक रूप से स्थिरता बनी रहेगी, हालाँकि शुरुआती ख़र्चे सामने आ सकते हैं। साल के बाद के 6 महीने समृद्धि ला सकते हैं, निवेश और धन संचय के लिए यह साल अच्छा हो सकता है। आपको संपत्ति के लेन-देन में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

पारिवारिक जीवन में अशांति का सामना करना पड़ सकता है, कलह और गलतफहमियाँ रिश्तों में खटास पैदा कर सकती हैं। फिर भी, बाद के महीनों में सौहार्द्र बढ़ सकता है, विशेषकर वैवाहिक संबंधों में। स्वास्थ्य मजबूत बना रहेगा और मानसिक स्वास्थ्य शांत है।

उपाय: अपने शयनकक्ष में अपने बिस्तर के ऊपर मोर पंख रखें और अपने घर में चंदन की हल्की सुगंध का प्रयोग करें।

मकर राशिफल 2025 - Makar Rashifal 2025

मकर राशि वालों, साल 2025 के आशाजनक वर्ष में आपका स्वागत है। लचीलेपन, महत्वाकांक्षा और व्यावहारिकता के आपके जन्मजात गुणों के साथ, यह वर्ष आपके व्यक्तिगत जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव के बावजूद, विकास और सफलता के प्रचुर अवसर रखता है।

नौकरी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए, विशेष रूप से साल के बाद के छः महीनों में, पहचान और उन्नति के अवसरों की उम्मीद है। इस समय सहकर्मियों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, लेकिन दृढ़ता और समर्पण सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगा। व्यावसायिक उद्यम शुरू में फलेंगे-फूलेंगे लेकिन बाद में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। आप इस साल तेजी से विस्तार के बजाय सतत विकास पर ध्यान दें।

विवाहित मकर राशि वालों को साल की शुरुआत में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन बातचीत और धैर्य स्थिरता को बढ़ावा देगा। अविवाहित लोगों को शुरुआती असफलताओं का अनुभव हो सकता है, लेकिन साल के बाद के छः महीने सार्थक संबंधों का वादा करता है। जो लोग रिश्तों में हैं वे उत्साहपूर्ण शुरुआत का आनंद लेंगे, हालाँकि बाद में बाधाएँ आपके रिश्ते की परीक्षा ले सकती हैं।

मकर वार्षिक राशिफल 2025 (Makar rashifal 2025) ) के अनुसार, आपकी वित्तीय संभावनाएं आशाजनक हैं, स्थिर आय और विवेकपूर्ण निवेश से रिटर्न मिल सकता है। साल के बाद के महीनों में आवेशपूर्ण खर्च से बचने के लिए सावधानी बरतें और पैसा उधार देने से बचें। साझेदारी वाले उद्यमों को शुरुआती असफलताओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन सावधानीपूर्वक योजना बनाने से इसमें वृद्धि की संभावना है।

इस साल पारिवारिक गतिशीलता कुल मिलाकर सामंजस्यपूर्ण रहेगी। मकर वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, हालाँकि वर्ष की शुरुआत में संघर्ष उत्पन्न हो सकते हैं। रिश्तों की देखभाल, विशेषकर माता-पिता के साथ, भावनात्मक स्थिरता प्रदान करेगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से, पूरे वर्ष शारीरिक गतिविधि और मानसिक कल्याण को प्राथमिकता दें।

प्रमुख ग्रहों की चाल मार्च और जुलाई में करियर के विकास के लिए शुभ समय का संकेत देती है, जबकि जून और नवंबर में वित्तीय लाभ होने की संभावना है। पारिवारिक सौहार्द के लिए मई और जून पर ध्यान दें और फरवरी और जुलाई में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। 

उपाय: रोज सुबह अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार करना शुरू करें।

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कुंभ राशिफल 2025 - Kumbh Rashifal 2025


साल 2025 में कुंभ राशि वालों को चुनौतियों और अवसरों दोनों का सामना करना पड़ेगा। करियर के लिहाज से, आपको स्थिर प्रगति की प्रतीक्षा है, हालांकि नकारात्मक प्रभाव धैर्य की परीक्षा ले सकते हैं। व्यावसायिक उद्यमों को शुरुआती बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे अंततः सफलता के लिए दृढ़ता की आवश्यकता होती है। इस साल विद्यार्थी परिश्रम से आगे बढ़ें।

रिश्तों में, विवाहित कुंभ राशि वालों को शुरुआती तनाव का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए सामंजस्य के लिए ठोस प्रयास की आवश्यकता होती है। सिंगल लोगों को बड़े फैसले टालने चाहिए। रिश्ते में रहने वाले लोग बाहरी हस्तक्षेप के बावजूद आपसी सद्भावना का आनंद ले सकते हैं।

कुंभ राशि के जातक रिश्तों में बौद्धिक संबंध और व्यक्तिगत स्थान को प्राथमिकता देते हैं, ऐसे साझेदारों की तलाश करते हैं जो आपके प्रगतिशील मूल्यों को साझा करें और आपके व्यक्तिगत विकास का समर्थन करें। साल 2025 में, विवाहित जातको आपको भावनात्मक संबंध में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए दूरियों को पाटने और अंतरंगता को फिर से खोजने के प्रयासों की आवश्यकता होगी। कुंभ वार्षिक राशिफल 2025 के अनुसार, अविवाहित लोगों को अनिश्चितता और अत्यधिक सोच का सामना करना पड़ सकता है। इस साल प्रतिबद्धता में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

कुंभ राशि के लोगों आप अपने करियर में स्वतंत्रता पर जोर देते हैं। अक्सर आप पारंपरिक मानदंडों को चुनौती देते हैं और नए समाधान तलाशते हैं। साल 2025 में, पहले छह महीनों में कार्यस्थल की गतिशीलता राजनीतिक रूप से प्रभावित हो सकती है, लेकिन विकास के अवसर बाद में सामने आएंगे। नौकरी से जुड़े जातक, कार्यालय की राजनीति से गुजरते हुए दूसरी छमाही में आसानी से आगे बढ़ सकते हैं और प्रमोशन की संभावना रख सकते हैं। आपको व्यावसायिक उद्यमों की शुरुआती बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन साल के अंत में बिजनेस फलते-फूलते दिख सकता है, खासकर मीडिया, आतिथ्य और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में।

वित्तीय रूप से, कुंभ राशि के जातक 2025 में मध्यम लाभ के साथ स्थिरता बनाए रखेंगे। हालांकि, निवेश में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, खासकर अस्थिर बाजार में। कुम्भ वार्षिक राशिफल 2025 (Kumbh rashifal 2025) ) के अनुसार, नौकरी क्षेत्र के व्यक्तियों को दूसरी छमाही में वेतन वृद्धि और बोनस मिल सकता है, जबकि व्यवसाय अच्छा रहेगा, खासकर वर्ष के साल के बाद के छः महीने में। साझेदारी वाले व्यवसायों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए वित्तीय लेनदेन की सावधानीपूर्वक निगरानी की आवश्यकता होगी। निवेश विशेष रूप से रियल एस्टेट और कमोडिटी में आशाजनक दिख सकता है, वर्ष की पहली छमाही विविध निवेश अवसरों के लिए अनुकूल हो सकती है।

साल 2025 में पारिवारिक जीवन की शुरुआत ख़ुशी से होगी, लेकिन बाद में संघर्ष और असुरक्षाएँ पैदा हो सकती हैं। विवाहित कुंभ राशि वालों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए सामंजस्य बनाए रखने के प्रयासों की आवश्यकता होगी। 

उपाय: रोज सुबह अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार करना शुरू करें।

मीन राशिफल 2025 - Meen Rashifal 2025


साल 2025 मीन राशि के जातकों के लिए चुनौतियाँ और अवसर से भरा हो सकता है। आप अपने संवेदनशील और दयालु स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। बृहस्पति द्वारा शासित, भाग्य और सफलता आपका अनुसरण करती है, फिर भी उनका स्वभाव विकर्षण पैदा कर सकता है। यह वर्ष व्यक्तिगत विकास और जीवन के सभी पहलुओं में संतुलन के लिए कड़ी मेहनत और समर्पण की मांग करता है।

मीन राशि के लोग प्यार को रोमांटिक और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से देखते हैं। आप भावनात्मक संबंध को गहराई से समझते हैं। साल की शुरुआत रिश्तों में चुनौतियों के साथ हो सकती है, विशेषकर विवाहित व्यक्तियों के लिए, जिसमें भावनात्मक और शारीरिक दूरी की संभावना हो सकती है। हालाँकि, साल के बाद के महीने स्थिरता और रोमांस को फिर से जागृत करने का वादा कर सकते हैं। अविवाहित लोगों को दिल टूटने का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन साल के बाद के छः महीने में आपको सांत्वना मिलेगी, सितंबर नई रोमांटिक मुलाकातों के लिए अनुकूल महीना है।

पेशेवर जीवन में, मीन राशि के लोग रचनात्मक वातावरण में कमाल कर सकते हैं। लेकिन साल 2025 में आप कार्यस्थल की राजनीति और विश्वास के मुद्दों से जूझ सकते हैं। नौकरी से जुड़ें जातकों को शुरू में दबाव और संघर्ष का सामना करना पड़ता है, लेकिन साल के अंत में उन्हें पहचान मिल सकती है।आपके व्यावसायिक उद्यमों को बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। आपके बिजनेस के विस्तार में बाधा आ सकती है, फिर भी परिश्रम से स्थिर लाभ प्राप्त किया जा सकता है। छात्रों को ध्यान भटकने का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अडिग प्रयासों से आप प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकते हैं।

आर्थिक रूप से, मीन राशि के जातक संतुलित आय और व्यय के साथ स्थिरता का अनुभव कर सकते हैं। जबकि आपके लिए अप्रत्याशित लागतें उत्पन्न हो सकती हैं। आपके स्थिर आय आरामदायक प्रबंधन की अनुमति देती है। निवेश से उच्च रिटर्न मिल सकता है, विशेषकर वर्ष की दूसरी छमाही में। हालाँकि, आपात स्थिति के लिए बजट और बचत की आवश्यकता के साथ, ऋण और साझेदारी में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

पारिवारिक जीवन सौहार्दपूर्ण ढंग से शुरू होता है, लेकिन वर्ष के अंत में संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है, विशेषकर भाई-बहनों और ससुराल वालों के साथ। मीन वार्षिक राशिफल 2025 (Meen Rashifal 2025) के अनुसार, विवाहित जोड़े धैर्य के साथ चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, जबकि अविवाहित लोगों को रिश्तों में भावनात्मक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

मीन राशि के लोग दृढ़ता और आशावाद के माध्यम से प्यार, करियर, वित्त, परिवार और स्वास्थ्य में आने वाली बाधाओं पर काबू पाते हुए आगे बढ़ सकते हैं। अपने अंतर्ज्ञान के प्रति सचेत रहकर और संतुलन की तलाश करके, आप आने वाले वर्ष में व्यक्तिगत विकास और पूर्णता प्राप्त कर सकते हैं। 

उपाय: अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनुलोम-विलोम और ध्यान करना शुरू करें और चांदी के गिलास से पानी पियें।

Vivah Muhurat 2025 साल 2025 में विवाह के लिए शुभ मांगलिक मुहूर्त


Vivah Muhurat 2025: साल 2025 में विवाह के लिए शुभ मांगलिक मुहूर्त



Shubh Vivah Muhurat 2025: क्या आप साल 2025 में शादी करने के लिए सही मुहूर्त और सही समय की तलाश में हैं? यदि आप अपना आने वाला वैवाहिक जीवन सुखी सुनिश्चित करने के लिए शुभ विवाह तिथियों में विश्वास करते हैं, तो आप जनवरी से दिसंबर 2025 तक इन शुभ विवाह मुहूर्त को जान सकते हैं और आगे के प्लान बना सकते हैं।

हिंदू संस्कारों में, विवाह को सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक जरूरी संस्कार माना जाता है। वैदिक शास्त्रों में कहते हैं, शादी एक पवित्र रिश्ता है और इसे हमेशा शुभ समय पर किया जाना चाहिए। जैसा कि सभी शुभ समारोहों के लिए एक उचित समय होता है वैसे ही विवाह का भी एक उचित समय होना चाहिए। अपने आने वाले वैवाहिक जीवन को खुशियों से भरा बनाने के लिए शुभ समय और तारीख का निर्धारण करना महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, विवाह केवल एक सामाजिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र मिलन भी है जो दो लोगों के साथ-साथ दो परिवार को एक दूसरे के साथ जोड़ता है और उन्हें जीवन भर के एक खूबसूरत रिश्ते में बांधता है। इसीलिए विवाह (Vivah) को समाज में इतना अधिक सम्मान दिया जाता है। इस दिन, दो लोग जीवन भर सुख-दुख में एक-दूसरे का साथ देने के लिए सात वचन लेते हैं। इसलिए, विवाह की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाना चाहिए, जिसमें कुंडली मिलान और शुभ विवाह तिथियों पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए करना भी शामिल है।

क्या आप 2025 में शुभ मुहूर्त से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 2025 में विवाह के काफी सारे शुभ मुहूर्त हैं। तो आइए विवाह शुभ मुहूर्त 2025 पर विस्तार से एक नज़र डालते हैं, जिसमें तिथि, समय, दिन और नक्षत्र शामिल हैं।

विवाह शुभ मुहूर्त 2025

आपको बता दें कि साल 2025 में आप शादी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए कई शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) चुन सकते हैं। हम आपके लिए हिन्दू पंचांग के अनुसार, साल 2025 के शादी शुभ मुहूर्त (Shubh Marriage Muhurat 2025) लाए हैं ताकि आपके सभी कार्य उपयुक्त तिथियों पर अच्छे से सम्पन्न हो सकें।
 
जनवरी 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


यदि आप सर्दियों में शादी करना चाहते हैं, तो आपके लिए शुभ विवाह की तिथियां चुनने के लिए जनवरी सबसे अद्धभुत महीना हो सकता है। इस जनवरी महीने में शादियों के लिए 10 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जनवरी 2025 में 16, 17, 18, 19, 20, 21, 23, 24, 26 और 27 जनवरी की तिथियां विवाह समारोह के लिए सबसे शुभ मानी गई हैं। विस्तृत समय और मुहूर्त नीचे उपलब्ध है। यदि आप विस्तृत शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए समय का उपयोग कर सकते हैं।

जनवरी शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (January 2025 Shubh Vivah Muhurat)


16 जनवरी 2025, बृहस्पतिवार, शुभ मुहूर्त: सुबह 04:06 बजे से 17 जनवरी 2025, सुबह 07:15 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


17 जनवरी 2025, शुक्रवार, शुभ मुहूर्त: सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


18 जनवरी 2025, शनिवार, शुभ मुहूर्त: रात 02:51 बजे से 19 जनवरी 2025, रात 01:16 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी।


19 जनवरी 2025, रविवार, शुभ मुहूर्त: रात 01:58 बजे से 20 जनवरी 2025, सुबह 07:14 बजे तक, नक्षत्र: हस्त।


20 जनवरी 2025, सोमवार, शुभ मुहूर्त: सुबह 07:14 बजे से 09:58 बजे तक, नक्षत्र: हस्त।


21 जनवरी 2025, मंगलवार, शुभ मुहूर्त: रात 11:36 बजे से 22 जनवरी 2025, रात 03:50 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


23 जनवरी 2025, बृहस्पतिवार, शुभ मुहूर्त: सुबह 05:08 बजे से 24 जनवरी 2025, सुबह 06:36 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा।


24 जनवरी 2025, शुक्रवार, शुभ मुहूर्त: रात 07:25 बजे से 25 जनवरी 2025, सुबह 07:07 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा।


26 जनवरी 2025, रविवार, शुभ मुहूर्त: रात 03:34 बजे से 27 जनवरी 2025, सुबह 07:12 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


27 जनवरी 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:12 से सुबह 09:02 बजे तक, नक्षत्र: मूल।

फरवरी 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


फरवरी को अक्सर प्यार का महीना कहा जाता है। यह वह समय होता है जब वैलेंटाइन डे मनाया जाता है, जो इसे शादियों के लिए प्रेम भरा समय बनाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह महीना शादी के बंधन में बंधने के लिए कई शुभ मुहूर्त प्रदान करता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फरवरी 2025 में 2, 3, 6, 7, 12, 13, 14, 15, 18, 19, 21, 23 और 25 तारीख को विवाह समारोह के लिए अनुकूल माना गया है। यदि आप विस्तृत शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए समय का उपयोग कर सकते हैं।

फरवरी शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (February Marriage Shubh Muhurat)

2 फरवरी 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 09:14 बजे से 07:08 बजे तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद, रेवती।


3 फरवरी 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:08 बजे से शाम 05:40 बजे तक, नक्षत्र: रेवती।


6 फरवरी 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 07:29 बजे से 7 फरवरी 2025, सुबह 07:06 बजे तक, नक्षत्र:रोहिणी।


7 फरवरी 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:06 बजे से शाम 04:17 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी, दशमी।


12 फरवरी 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 01:58 बजे से 13 फरवरी 2025, सुबह 07:01 बजे तक, नक्षत्र:मघा।


13 फरवरी 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:01 बजे से सुबह 07:31 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


14 फरवरी 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 11:09 बजे से 15 फरवरी 2025, 06:59 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी, हस्त।


15 फरवरी 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:59 बजे से सुबह 10:48 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी।


15 फरवरी 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से शाम 06:59 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी, हस्त।


16 फरवरी 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:59 बजे से सुबह 08:06 बजे तक, नक्षत्र: हस्त।


18 फरवरी 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 09:52 बजे से 9 फरवरी 2025, सुबह 06:56 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


19 फरवरी 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:56 बजे से रात 07:32 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


21 फरवरी 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 03:54 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा।


23 फरवरी 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: दोपहर 01:55 बजे से सुबह 06:43 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


25 फरवरी 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 08:15 बजे से शाम 06:31 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराषाढा।


मार्च 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


मार्च सुहावने मौसम यानि बसंत के शुरूआत का प्रमुख समय है। यह सर्दियों से भरे दिनों से गर्म दिनों में परिवर्तन का महीना होता है, जिससे यह शादियों के लिए एक खास महीना बन जाता है। आप इस महीने को अपने खास दिन यानि शादी के लिए सबसे अच्छा समय मान सकते हैं, क्योंकि मार्च मौसम में बदलाव लेकर आता है। इसलिए, आप इस महीने में शादी की तारीखों को चुनकर अपना शादी का प्रोग्राम तय कर सकते हैं। मार्च 2025 में शादियों के लिए 5 भाग्यशाली शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मार्च 2025 की 1, 2, 6, 7 और 12 तारीखें शादी समारोहों के लिए शुभ मानी गई हैं।

मार्च शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (March Marriage Shubh Muhurat)


1 मार्च 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 11:22 बजे से 1 मार्च 2025, सुबह 06:45 बजे तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद, तृतीया।


2 मार्च 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:45 से 03 मार्च 2025 रात 01:14 बजे तक, नक्षत्र:उत्तर भाद्रपद, रेवती


6 मार्च 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 10:01 बजे से 7 मार्च 2025, सुबह 06:40 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी, मॄगशिरा।


7 मार्च 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:40 बजे से सुबह 11:32 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा।


12 मार्च 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 08:43 बजे से 12 मार्च 2025, सुबह 04:05 बजे तक, नक्षत्र: मघा।

अप्रैल 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


अप्रैल अपने चंचल स्वभाव के लिए जाना जाता है, मनमौजी हवा की तरह। कभी-कभार होने वाली बारिश के साथ, यह वह समय होता है जब बारिश और गर्म हवाएं आने के संकेत मिलते हैं। इस अप्रैल महीने के दौरान, प्रकृति अपनी नींद से जागती है, और हमें बारिश से भीगी हुई मिट्टी से उगने वाले नए विकास अंकुरों की सुंदरता देखने को मिलती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अप्रैल 2025 में 9 विवाह मुहूर्त है। 14, 16, 18, 19, 20, 21, 25, 29 और 30 जैसी तारीखें अप्रैल 2025 विवाह समारोहों के लिए खास महत्व रखती हैं। यदि आप विस्तृत शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए समय का उपयोग कर सकते हैं।

अप्रैल शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (April Marriage Shubh Muhurat)

14 अप्रैल 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 10:39 बजे से 15 अप्रैल 2025, रात 12:13 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


16 अप्रैल 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 12:19 बजे से 17 अप्रैल 2025,05:54 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा।


18 अप्रैल 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 01:04 से 19 अप्रैल 2025, सुबह 05:52 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


19 अप्रैल 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:52 से सुबह 10:21 बजे तक, नक्षत्र:मूल।


20 अप्रैल 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से 21 अप्रैल 2025, सुबह 05:50 बजे तक, नक्षत्र:उत्तराषाढा।


21 अप्रैल 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:50 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक, नक्षत्र:उत्तराषाढा।


25 अप्रैल 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 08:53 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक, नक्षत्र:उत्तर भाद्रपद।


29 अप्रैल 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: शाम 06:47 बजे से 30 अप्रैल 2025, सुबह 05:41 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी।


30 अप्रैल 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:41 बजे से दोपहर 12:02 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी।

मई 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


मई अपने साथ फूलों के खिलने और गर्म दिनों को लेकर आती है, जो एक तरह से गर्मियों की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मई में विवाह समारोहों के लिए 15 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। मई 2025 में 1, 5, 6, 8, 10, 14, 15, 16, 17, 18, 22, 23, 24, 27 और 28 जैसी तारीखें शादी के रिश्ते में बंधने के लिए शुभ हैं। यदि आप विस्तृत शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए समय का उपयोग कर सकते हैं।

मई शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (May Marriage Shubh Muhurat)

1 मई 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 11:23 बजे से दोपहर 02:21 बजे तक, नक्षत्र: मॄगशिरा।


5 मई 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 08:29 बजे से 6 मई 2025, सुबह 05:36 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


6 मई 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:36 बजे से दोपहर 03:52 बजे तक, नक्षत्र: मघा, दशमी।


8 मई 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: दोपहर 12:29 बजे से 9 मई 2025,रात 01:57 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी, हस्त।


10 मई 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 03:15 बजे से 11 मई 2025,सुबह 04:01 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती, चित्रा।


14 मई 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:34 बजे से सुबह 11:47 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा।


15 मई 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 04:02 बजे से 16 मई 2025, सुबह 05:30 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


16 मई 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:30 बजे से शाम 04:07 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


17 मई 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: शाम 05:44 बजे से 18 मई 2025, सुबह 05:29 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराषाढा।


18 मई 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:29 बजे से शाम 06:52 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराषाढा।


22 मई 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 01:12 बजे से 23 मई 2025, सुबह 05:26 बजे तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद।


23 मई 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:26 बजे से 24 मई 2025, सुबह 05:26 बजे तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद, रेवती।


24 मई 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:26 बजे से सुबह 08:22 बजे तक, नक्षत्र: रेवती।


27 मई 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: शाम 06:45 बजे से 28 मई 2025, रात 02:50 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी,


28 मई 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:25 बजे से शाम 07:09 बजे तक, नक्षत्र: मॄगशिरा।

जून 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


जून गर्मी की तपिश और लंबे दिनों वाला महीना होता है, जो खुशी और विकास के मौसम की शुरुआत करता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जून में विवाह समारोहों के लिए 5 शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। जून 2025 में 2, 4, 5, 7 और 8 जैसी तारीखें शादी करने के लिए अनकूल हैं। यदि आप विस्तृत शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए समय का उपयोग कर सकते हैं।

जून शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (June Marriage Shubh Muhurat)

2 जून 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 08:21 बजे से रात 08:34 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


4 जून 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 08:29 बजे से 5 जून 2025,सुबह 05:23 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी, हस्त।


5 जून 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:23 बजे से सुबह 09:14 बजे तक, नक्षत्र: हस्त।


7 जून 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 09:40 बजे से सुबह 11:18 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


8 जून 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: दोपहर 12:18 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक, नक्षत्र: विशाखा, स्वाती।
जुलाई, अगस्त, सितम्बर, अक्टूबर 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त धार्मिक मान्यताओं में जब ग्रहों की अनुकूल स्तिथि न हो तब विवाह का शुभ कार्य करना उचित नहीं होता है। साल 2025 में इन महीनों में नक्षत्रों की सही स्तिथि न होने के कारण शादी करने के लिए कोई भी मुहूर्त उपलब्ध नहीं हैं।


नबंवर 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


नवंबर से दिन छोटे होने लगते हैं, और हवायें भी काफी ठंडी हो जाती है, जिससे हर कोई अपने गर्म कपड़े पहनना शुरू कर देता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल 2025 में नवंबर महीने 14 शुभ मुहूर्त हैं। नवंबर महीने में आप 2, 3, 6, 8, 12, 13, 16, 17, 18, 21, 22, 23, 25 और 30 तिथियों पर शादी समारोह आयोजित कर सकते हैं। यदि आप विस्तृत शुभ समय जानना चाहते हैं, तो आप नीचे दिए गए समय का उपयोग कर सकते हैं।

नवंबर शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (November Marriage Shubh Muhurat)

2 नवम्बर 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 11:11 बजे से 3 नवम्बर 2025, सुबह 06:34 बजे तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद।


3 नवम्बर 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:34 बजे से शाम 07:40 बजे तक, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद, रेवती।


6 नवम्बर 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 03:28 बजे से 7 नवम्बर 2025, सुबह 06:37 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी।


8 नवम्बर 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:32 बजे से रात 10:02 बजे तक, नक्षत्र: मॄगशिरा।


12 नवम्बर 2025, बुधवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 12:51 बजे से 13 नवम्बर 2025, सुबह 06:42 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


13 नवम्बर 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:42 बजे से शाम 07:38 बजे तक, नक्षत्र: मघा।


16 नवम्बर 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:47 बजे से 17 नवम्बर 2025, रात 02:11 बजे तक, नक्षत्र: हस्त।


17 नवम्बर 2025, सोमवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 05:01 बजे से 18 नवम्बर 2025, सुबह 06:46 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


18 नवम्बर 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:46 बजे से सुबह 07:12 बजे तक, नक्षत्र: स्वाती।


21 नवम्बर 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 10:44 बजे से दोपहर 01:56 बजे तक, नक्षत्र: अनुराधा।


22 नवम्बर 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: रात 11:27 बजे से 23 नवम्बर 2025, सुबह 06:50 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


23 नवम्बर 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:50 बजे से दोपहर 12:09 बजे तक, नक्षत्र: मूल।


25 नवम्बर 2025, मंगलवार, शुभ विवाह मुहूर्त: दोपहर 12:50 बजे से रात 11:57 बजे तक, नक्षत्र: उत्तराषाढा।


30 नवम्बर 2025, रविवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:12 बजे से 01 दिसम्बर 2025, सुबह 06:56, नक्षत्र: उत्तर भाद्रपद, रेवती।
 
दिसंबर 2025 में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त


दिसंबर उत्सव और सद्भावना की चादर में लिपटा हुआ आता है। यह एक ऐसा महीना है जहां हवा ताजा पके हुए व्यंजनों की सुगंध और छुट्टियों की रोशनी की चमक से भर जाती है। ठंड के बीच, यह एकजुटता की भावना को बढ़ावा देता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार 4, 5 और 6 दिसंबर 2025 आदि तिथियां शादी करने के लिए शुभ होंगी। अगर आप विस्तृत शुभ मुहूर्त जानना चाहते है तो नीचे दिए मुहूर्त का उपयोग करें।

दिसंबर शादी शुभ मुहूर्त यहाँ देखें! (December Marriage Shubh Muhurat)

4 दिसम्बर 2025, बृहस्पतिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: शाम 06:40 बजे से 5 दिसम्बर 2025, सुबह 06:59 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी।


5 दिसम्बर 2025, शुक्रवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 06:59 बजे से 6 दिसम्बर 2025, सुबह 07:00 बजे तक, नक्षत्र: रोहिणी, मॄगशिरा।


6 दिसम्बर 2025, शनिवार, शुभ विवाह मुहूर्त: सुबह 07:00 बजे से सुबह 08:48 बजे तक, नक्षत्र: मॄगशिरा।

नरसिंह जयंती Narasimha Jayanti Varat Katha



भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिंह भगवान माने जाते हैं। बैशाख मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नरसिंह जयंती(narasimha jayanti) मनाई जाती है। पौराणिक कथानुसार, महर्षि कश्यप और अदिति के हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप नाम के दो पुत्र हुए। दोनों ही बहुत शक्तिशाली और राक्षसों के राजा थे। हिरण्याक्ष का आतंक इतना बढ़ गया कि भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर उसका वध कर दिया। वहीं भाई के वध के क्रोधित हो कर हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु से बदला लेने की ठानी। इसके लिए हिरण्याकश्यप ने हजारों साल तप किया और ब्रह्मा जी को प्रसन्न करके वरदान मांगा। उसने वरदान मांगा कि कोई नर या पशु उसका वध न कर सके और ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह दिया।

ब्रह्मा जी के वरदान के बाद हिरण्याकश्यप निर्भीक हो गया औऱ उसने तीनों लोकों पर आतंक मचा दिया। उसने स्वर्गलोक से देवताओं को निर्वासित कर दिया और तीनों लोकों पर आधिपत्य जमा लिया। भगवान विष्णु से प्रतिशोध लेने के लिए उसने अपने राज्य में घोषणा की कि वह स्वयं भगवान है और उसके अलावा कोई किसी को नहीं पूजेगा। लेकिन हिरण्याकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद के जन्म के बाद उसकी भक्ति से भयभीत होने लगा, उसे मृत्युलोक पहुंचाने का प्रयार करने लगा। उसने अपनी बहन होलिका के जरिए भी प्रह्लाद का वध करना चाहा लेकिन होलिका खुद ही जल गई। बहन की मृत्यु के बाद हिरण्याकश्यप अत्यधिक क्रोधित हो गया और उसने बैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिन अपने पुत्र का वध करने की ठानी।

हिरण्याकश्यप ने प्रह्लाद से कहा कि तुम अपने भगवान विष्णु को बुलाओ। इस पर प्रह्लाद ने कहा कि प्रभु सर्वत्र विद्यमान है और कण-कण में समाए हुए हैं। इस पर प्रह्लाद का उपहास उड़ाते हुए कहा कि इस स्तंभ में भी तुम्हारा विष्णु मौजूद है, तो प्रह्लाद ने कहा कि हां इसमें भी वह विद्यमान हैं। ये बात सुनकर हिरण्याकश्यप को क्रोध आ गया और उसने स्तंभ पर अपनी तलवार से वार किया। वार करते ही स्तंभ को चीरकर भगवान विष्णु के अवतार नरसिंह प्रकट हुए। नरसिंह भगवान ने हिरण्याकश्यप को अपनी गोद में लिटाकर अपने नाखुन से उसका पेट चीर डाला। लेकिन इसके बाद भी नरसिंह भगवान का क्रोध शांत नहीं हुआ । उनके क्रोध को शांत करने के लिए सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तीनों देवता भगवान नरसिंह का क्रोध शांत कराने पहुंचे लेकिन उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। यहां तक साक्षात भगवान शिव सामने आकर खड़े हो गए, लेकिन नरसिंह भगवान ने उन पर आक्रमण कर दिया। भगवान शंकर को क्रोध आ गया और उन्होंने एक विकराल वृषभ का रूप धारण कर लिया और नरसिंह को अपनी पूंछ में लपेटकर खींचकर पाताल में ले गए। काफी देर तक नरसिंह को जकड़कर रखा और नरसिंह ने अपनी सभी शक्तियों को इस्तेमाल किया लेकिन स्वतंत्र होने में असमर्थ रहे और शक्तिहीन हो गए। इसके बाद भगवान नरसिंह का क्रोध शांत हुआ।

Narasimha Jayanti Varat Katha in English

bhagavaan vishṇu ke chowthe avataar narasinh bhagavaan maane jaate hain. baishaakh maas kii shukl paksh kii chaturdashii ko narasinh jayantii(narasimha jayanti) manaaii jaatii hai. powraaṇik kathaanusaar, maharshi kashyap owr aditi ke hiraṇyaaksh owr hiraṇyakashyap naam ke do putr hue. donon hii bahut shaktishaalii owr raakshason ke raajaa the. hiraṇyaaksh kaa aatank itanaa badh gayaa ki bhagavaan vishṇu ne varaah avataar lekar usakaa vadh kar diyaa. vahiin bhaaii ke vadh ke krodhit ho kar hiraṇyakashyap ne bhagavaan vishṇu se badalaa lene kii ṭhaanii. isake lie hiraṇyaakashyap ne hajaaron saal tap kiyaa owr brahmaa jii ko prasann karake varadaan maangaa. usane varadaan maangaa ki koii nar yaa pashu usakaa vadh n kar sake owr brahmaa jii ne tathaastu kah diyaa. 
brahmaa jii ke varadaan ke baad hiraṇyaakashyap nirbhiik ho gayaa owऱ usane tiinon lokon par aatank machaa diyaa. usane svargalok se devataaon ko nirvaasit kar diyaa owr tiinon lokon par aadhipaty jamaa liyaa. bhagavaan vishṇu se pratishodh lene ke lie usane apane raajy men ghoshaṇaa kii ki vah svayam bhagavaan hai owr usake alaavaa koii kisii ko nahiin puujegaa. lekin hiraṇyaakashyap apane putr prahlaad ke janm ke baad usakii bhakti se bhayabhiit hone lagaa, use mṛtyulok pahunchaane kaa prayaar karane lagaa. usane apanii bahan holikaa ke jarie bhii prahlaad kaa vadh karanaa chaahaa lekin holikaa khud hii jal gaii. bahan kii mṛtyu ke baad hiraṇyaakashyap atyadhik krodhit ho gayaa owr usane baishaakh shukl chaturdashii ke din apane putr kaa vadh karane kii ṭhaanii. 
Hiraṇyaakashyap ne prahlaad se kahaa ki tum apane bhagavaan vishṇu ko bulaao. Is par prahlaad ne kahaa ki prabhu sarvatr vidyamaan hai owr kaṇ-kaṇ men samaae hue hain. Is par prahlaad kaa upahaas udaate hue kahaa ki is stambh men bhii tumhaaraa vishṇu mowjuud hai, to prahlaad ne kahaa ki haan isamen bhii vah vidyamaan hain. Ye baat sunakar hiraṇyaakashyap ko krodh aa gayaa owr usane stambh par apanii talavaar se vaar kiyaa. Vaar karate hii stambh ko chiirakar bhagavaan vishṇu ke avataar narasinh prakaṭ hue. Narasinh bhagavaan ne hiraṇyaakashyap ko apanii god men liṭaakar apane naakhun se usakaa peṭ chiir ḍaalaa. Lekin isake baad bhii narasinh bhagavaan kaa krodh shaant nahiin huaa . Unake krodh ko shaant karane ke lie sabhii devataa bhagavaan vishṇu ke paas pahunche. Tiinon devataa bhagavaan narasinh kaa krodh shaant karaane pahunche lekin unakaa krodh shaant nahiin huaa. Yahaan tak saakshaat bhagavaan shiv saamane aakar khade ho gae, lekin narasinh bhagavaan ne un par aakramaṇ kar diyaa. Bhagavaan shankar ko krodh aa gayaa owr unhonne ek vikaraal vṛshabh kaa ruup dhaaraṇ kar liyaa owr narasinh ko apanii puunchh men lapeṭakar khiinchakar paataal men le gae. Kaaphii der tak narasinh ko jakadakar rakhaa owr narasinh ne apanii sabhii shaktiyon ko istemaal kiyaa lekin svatantr hone men asamarth rahe owr shaktihiin ho gae. Isake baad bhagavaan narasinh kaa krodh shaant huaa.

भाई दूज व्रत कथा Bhai Dooj Varat Katha



हिंदू धर्म में भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह को दर्शाने के लिए रक्षाबंधन और भाई दूज (Bhai Dooj) जैसे पर्व मनाए जाने की परंपरा है। वहीं दीपावली के दो दिन बाद भाई दूज मनाई जाती है। इस दिन बहनें अपने भाई को तिलक करती हैं और यमराज से अपने भाई की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। वहीं स्कंदपुराण के अनुसार इस दिन यमराज को प्रसन्न करने वाले को अकाल मृ्त्यु के भय से निजात भी मिल जाती है। इसलिए इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा जो भाई-बहन भाई दूज (Bhai Dooj Vrat Katha) का पर्व मनाते हैं उन्हें धन-धान्य, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कथानुसार इस दिन यमराज ने अपनी बहन यमुना के दर्शन दिए थे।


पौराणिक कथानुसार, भगवान सूर्यदेव की पत्नी छाया थी उनकी कोख से यमराज और यमुना का जन्म हुआ था। लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब छाया सूर्य का तेज सहन नहीं कर पाने की वजह से उत्तरी ध्रुव में रहने लगीं। छाया के साथ यमराज और यमुना भी रहने लगे। एक समय के बाद यमराज ने अपनी यमपुरी नगरी को बसा लिया औऱ यमुना गोलोक में निवास करने लगी। लेकिन दोनों में स्नेह सदैव बना रहा। यमुना अपने भाई यमराज को अपने घर इष्ट मित्रों सहित हमेशा भोजन के लिए आमंत्रित करती थी। लेकिन यमराज उन्हें टालते रहते थे। कार्तिक शुक्ल द्वितिया का दिन आया और यमुना ने फिर यमराज को अपने घर भोजन के लिए निमंत्रण दिया और इस बार अपने भाई से वचन ले लिया। यमराज ने सोचा कि मैं तो प्राणों को हरने वाला हूं भला मुझे कोई अपने घर क्यों बुलाना चाहेंगा। यदि बहन ने इतने प्यार से बुलाया है तो मैं अपने धर्म का पालन करूंगा।


वहीं यमराज ने बहन के घर जाते वक्त नरक के सभी जीवों को मुक्त कर दिया। यमराज को अपने घर देखकर यमुना खुशी से झूम उठी। उसने अपने भाई का स्वागत किया और उसके समक्ष अनेक व्यंजन परोसे। यमुना के इस आतिथ्य सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन से वरदान मांगने के लिए कहा। यमुना ने यमराज से कहा कि वह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि में आप मेरे घर आया करें। साथ ही उन्होंने यह कहा कि उनकी तरह कोई भी बहन इस दिन यदि अपने भाई का विधिपूर्वक तिलक करे, तो उसे यमराज यानि मृत्यु का भय ना हो। यमराज ने मुस्कराते हुए तथास्तु कहा और यमुना को वरदान देकर यमलोक लौट आये। तब से लेकर आजतक हिन्दू धर्म में भाई दूज की परंपरा चली आ रही है।

Bhai Dooj Varat Katha in English

hinduu dharm men bhaaii-bahan ke aṭuuṭ prem owr sneh ko darshaane ke lie rakshaabandhan owr bhaaii duuj (Bhai Dooj) jaise parv manaae jaane kii paramparaa hai. vahiin diipaavalii ke do din baad bhaaii duuj manaaii jaatii hai. is din bahanen apane bhaaii ko tilak karatii hain owr yamaraaj se apane bhaaii kii diirghaayu kii praarthanaa karatii hain. vahiin skandapuraaṇ ke anusaar is din yamaraaj ko prasann karane vaale ko akaal mṛtyu ke bhay se nijaat bhii mil jaatii hai. isalie ise yam dvitiiyaa ke naam se bhii jaanaa jaataa hai. isake alaavaa jo bhaaii-bahan bhaaii duuj (Bhai Dooj Vrat Katha) kaa parv manaate hain unhen dhan-dhaany, diirghaayu owr sukh-samṛddhi kii praapti hotii hai. kathaanusaar is din yamaraaj ne apanii bahan yamunaa ke darshan die the. 
powraaṇik kathaanusaar, bhagavaan suuryadev kii patnii chhaayaa thii unakii kokh se yamaraaj owr yamunaa kaa janm huaa thaa. lekin ek vakt aisaa aayaa jab chhaayaa suury kaa tej sahan nahiin kar paane kii vajah se uttarii dhruv men rahane lagiin. chhaayaa ke saath yamaraaj owr yamunaa bhii rahane lage. ek samay ke baad yamaraaj ne apanii yamapurii nagarii ko basaa liyaa owऱ yamunaa golok men nivaas karane lagii. lekin donon men sneh sadaiv banaa rahaa. yamunaa apane bhaaii yamaraaj ko apane ghar ishṭ mitron sahit hameshaa bhojan ke lie aamantrit karatii thii. lekin yamaraaj unhen ṭaalate rahate the. kaartik shukl dvitiyaa kaa din aayaa owr yamunaa ne phir yamaraaj ko apane ghar bhojan ke lie nimantraṇ diyaa owr is baar apane bhaaii se vachan le liyaa. yamaraaj ne sochaa ki main to praaṇon ko harane vaalaa huun bhalaa mujhe koii apane ghar kyon bulaanaa chaahengaa. yadi bahan ne itane pyaar se bulaayaa hai to main apane dharm kaa paalan karuungaa. 
Vahiin yamaraaj ne bahan ke ghar jaate vakt narak ke sabhii jiivon ko mukt kar diyaa. Yamaraaj ko apane ghar dekhakar yamunaa khushii se jhuum uṭhii. Usane apane bhaaii kaa svaagat kiyaa owr usake samaksh anek vyanjan parose. Yamunaa ke is aatithy satkaar se prasann hokar yamaraaj ne apanii bahan se varadaan maangane ke lie kahaa. Yamunaa ne yamaraaj se kahaa ki vah pratyek varsh kaartik maas kii shukl paksh kii dvitiiy tithi men aap mere ghar aayaa karen. Saath hii unhonne yah kahaa ki unakii tarah koii bhii bahan is din yadi apane bhaaii kaa vidhipuurvak tilak kare, to use yamaraaj yaani mṛtyu kaa bhay naa ho. Yamaraaj ne muskaraate hue tathaastu kahaa owr yamunaa ko varadaan dekar yamalok lowṭ aaye. Tab se lekar aajatak hinduu dharm men bhaaii duuj kii paramparaa chalii aa rahii hai.

अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा Anant Chaturdashi Varat Katha



भाद्रपद की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी(anant chaturdashi) का व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के बाद अनंत सूत्र बांधा जाता है। इस व्रत से जुड़ी एक लोककथा है।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार प्राचीन समय में सुमंत नाम के एक ऋषि हुआ करते थे उनकी पत्नी का नाम था दीक्षा। कुछ समय के पश्चात दीक्षा ने एक सुंदर कन्या को जन्म दिया जिसका नाम रखा गया सुशीला, लेकिन कुछ ही समय के पश्चात सुशीला के सिर से मां का साया उठ गया। अब ऋषि को बच्ची के लालन-पालन की चिंता होने लगी तो उन्होंने दूसरा विवाह करने का निर्णय लिया। उनकी दूसरी पत्नी और सुशीला की सौतेली मां का नाम कर्कशा था। वह अपने नाम की तरह ही स्वभाव से भी कर्कश थी। जैसे तैसे प्रभु कृपा से सुशीला बड़ी होने लगी और वह दिन भी आया जब ऋषि सुमंत को उसके विवाह की चिंता सताने लगी। काफी प्रयासों के पश्चात कौडिन्य ऋषि से सुशीला का विवाह संपन्न हुआ। लेकिन यहां भी सुशीला को दरिद्रता का ही सामना करना पड़ा। उन्हें जंगलों में भटकना पड़ रहा था। एक दिन उन्होंने देखा कि कुछ लोग अनंत भगवान की पूजा कर रहे हैं और हाथ में अनंत रक्षासूत्र भी बांध रहे हैं। सुशीला ने उनसे अनंत भगवान के व्रत के महत्व को जानकर पूजा का विधि विधान पूछा और उसका पालन करते हुए अनंत रक्षासूत्र अपनी कलाई पर भी बांध लिया। देखते ही देखते उनके दिन फिरने लगे। कौण्डिन्य ऋषि में अंहकार आ गया कि यह सब उन्होंने अपनी मेहनत से निर्मित किया है काफी हद तक सही भी था प्रयास तो बहुत किया था।

अगले ही वर्ष ठीक अनंत चतुर्दशी की बात है सुशीला अनंत भगवान का शुक्रिया कर उनकी पूजा आराधना कर अनंत रक्षासूत्र को बांध कर घर लौटी तो कौण्डिन्य को उसके हाथ में बंधा वह अनंत धागा दिखाई दिया और उसके बारे में पूछा। सुशीला ने खुशी-खुशी बताया कि अनंत भगवान की आराधना कर यह रक्षासूत्र बंधवाया है इसके पश्चात ही हमारे दिन बहुरे हैं। इस पर कौडिन्य खुद को अपमानित महसूस करने लगे कि उनकी मेहनत का श्रेय सुशीला अपनी पूजा को दे रही है। उन्होंने उस धागे को उतरवा दिया। इससे अनंत भगवान रूष्ट हो गये और देखते ही देखते कौडिन्य अर्श से फर्श पर आ गिरे। तब एक विद्वान ऋषि ने उन्हें उनके किये का अहसास करवाया और कौडिन्य को अपने कृत्य का पश्चाताप करने को कहा। लगातार 14 वर्षों तक उन्होंने अनंत चतुर्दशी का उपवास रखा उसके पश्चात भगवान श्री हरि प्रसन्न हुए और कौडिन्य व सुशीला फिर से सुखपूर्वक रहने लगे।

Anant Chaturdashi Varat Katha in English

Bhaadrapad kii shukl paksh kii chaturdashii ko anant chaturdashii(anant chaturdashi) kaa vrat kiyaa jaataa hai. Is din bhagavaan vishṇu kii puujaa archanaa ke baad anant suutr baandhaa jaataa hai. Is vrat se judii ek lokakathaa hai.


Powraaṇik granthon ke anusaar praachiin samay men sumant naam ke ek ṛshi huaa karate the unakii patnii kaa naam thaa diikshaa. Kuchh samay ke pashchaat diikshaa ne ek sundar kanyaa ko janm diyaa jisakaa naam rakhaa gayaa sushiilaa, lekin kuchh hii samay ke pashchaat sushiilaa ke sir se maan kaa saayaa uṭh gayaa. Ab ṛshi ko bachchii ke laalan-paalan kii chintaa hone lagii to unhonne duusaraa vivaah karane kaa nirṇay liyaa. Unakii duusarii patnii owr sushiilaa kii sowtelii maan kaa naam karkashaa thaa. Vah apane naam kii tarah hii svabhaav se bhii karkash thii. Jaise taise prabhu kṛpaa se sushiilaa badii hone lagii owr vah din bhii aayaa jab ṛshi sumant ko usake vivaah kii chintaa sataane lagii. Kaaphii prayaason ke pashchaat kowḍiny ṛshi se sushiilaa kaa vivaah sampann huaa. Lekin yahaan bhii sushiilaa ko daridrataa kaa hii saamanaa karanaa padaa.

Unhen jangalon men bhaṭakanaa pad rahaa thaa. Ek din unhonne dekhaa ki kuchh log anant bhagavaan kii puujaa kar rahe hain owr haath men anant rakshaasuutr bhii baandh rahe hain. Sushiilaa ne unase anant bhagavaan ke vrat ke mahatv ko jaanakar puujaa kaa vidhi vidhaan puuchhaa owr usakaa paalan karate hue anant rakshaasuutr apanii kalaaii par bhii baandh liyaa. Dekhate hii dekhate unake din phirane lage. Kowṇḍiny ṛshi men amhakaar aa gayaa ki yah sab unhonne apanii mehanat se nirmit kiyaa hai kaaphii had tak sahii bhii thaa prayaas to bahut kiyaa thaa.

Agale hii varsh ṭhiik anant chaturdashii kii baat hai sushiilaa anant bhagavaan kaa shukriyaa kar unakii puujaa aaraadhanaa kar anant rakshaasuutr ko baandh kar ghar lowṭii to kowṇḍiny ko usake haath men bandhaa vah anant dhaagaa dikhaaii diyaa owr usake baare men puuchhaa. Sushiilaa ne khushii-khushii bataayaa ki anant bhagavaan kii aaraadhanaa kar yah rakshaasuutr bandhavaayaa hai isake pashchaat hii hamaare din bahure hain. Is par kowḍiny khud ko apamaanit mahasuus karane lage ki unakii mehanat kaa shrey sushiilaa apanii puujaa ko de rahii hai. Unhonne us dhaage ko utaravaa diyaa. Isase anant bhagavaan ruushṭ ho gaye owr dekhate hii dekhate kowḍiny arsh se pharsh par aa gire. Tab ek vidvaan ṛshi ne unhen unake kiye kaa ahasaas karavaayaa owr kowḍiny ko apane kṛty kaa pashchaataap karane ko kahaa. Lagaataar 14 varshon tak unhonne anant chaturdashii kaa upavaas rakhaa usake pashchaat bhagavaan shrii hari prasann hue owr kowḍiny v sushiilaa phir se sukhapuurvak rahane lage.

वट सावित्री व्रत कथा Vat Savitri Varat Katha



वट सावित्री(vat savitri) व्रत की यह कथा सत्यवान-सावित्री के नाम से उत्तर भारत में विशेष रूप से प्रचलित हैं। कथा के अनुसार एक समय की बात है कि मद्रदेश में अश्वपति नाम के धर्मात्मा राजा का राज था। उनकी कोई भी संतान नहीं थी। राजा ने संतान हेतु यज्ञ करवाया। कुछ समय बाद उन्हें एक कन्या की प्राप्ति हुई जिसका नाम उन्होंने सावित्री रखा। विवाह योग्य होने पर सावित्री के लिए द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को पतिरूप में वरण किया। सत्यवान वैसे तो राजा का पुत्र था लेकिन उनका राज-पाट छिन गया था और अब वह बहुत ही द्ररिद्रता का जीवन जी रहे थे। उसके माता-पिता की भी आंखो की रोशनी चली गई थी। सत्यवान जंगल से लकड़ियां काटकर लाता और उन्हें बेचकर जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहा था। जब सावित्री और सत्यवान के विवाह की बात चली तो नारद मुनि ने सावित्री के पिता राजा अश्वपति को बताया कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के एक वर्ष बाद ही उनकी मृत्यु हो जाएगी। हालांकि राजा अश्वपति सत्यवान की गरीबी को देखकर पहले ही चिंतित थे और सावित्री को समझाने की कोशिश में लगे थे। नारद की बात ने उन्हें और चिंता में डाल दिया लेकिन सावित्री ने एक न सुनी और अपने निर्णय पर अडिग रही। अंततः सावित्री और सत्यवान का विवाह हो गया। सावित्री सास-ससुर और पति की सेवा में लगी रही। नारद मुनि ने सत्यवान की मृत्यु का जो दिन बताया था, उसी दिन सावित्री भी सत्यवान के साथ वन को चली गई। वन में सत्यवान लकड़ी काटने के लिए जैसे ही पेड़ पर चढ़ने लगा, उसके सिर में असहनीय पीड़ा होने लगी और वह सावित्री की गोद में सिर रखकर लेट गया। कुछ देर बाद उनके समक्ष अनेक दूतों के साथ स्वयं यमराज खड़े हुए थे।

जब यमराज सत्यवान के जीवात्मा को लेकर दक्षिण दिशा की ओर चलने लगे, पतिव्रता सावित्री भी उनके पीछे चलने लगी। आगे जाकर यमराज ने सावित्री से कहा, ‘हे पतिव्रता नारी! जहां तक मनुष्य साथ दे सकता है, तुमने अपने पति का साथ दे दिया। अब तुम लौट जाओ। इस पर सावित्री ने कहा, ‘जहां तक मेरे पति जाएंगे, वहां तक मुझे जाना चाहिए। यही सनातन सत्य है।’ यमराज सावित्री की वाणी सुनकर प्रसन्न हुए और उसे वर मांगने को कहा। सावित्री ने कहा, ‘मेरे सास-ससुर अंधे हैं, उन्हें नेत्र-ज्योति दें।’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर उसे लौट जाने को कहा और आगे बढ़ने लगे। किंतु सावित्री यम के पीछे ही चलती रही। यमराज ने प्रसन्न होकर पुन: वर मांगने को कहा। सावित्री ने वर मांगा, ‘मेरे ससुर का खोया हुआ राज्य उन्हें वापस मिल जाए।’ यमराज ने ‘तथास्तु’ कहकर पुनः उसे लौट जाने को कहा, परंतु सावित्री अपनी बात पर अटल रही और वापस नहीं गयी। सावित्री की पति भक्ति देखकर यमराज पिघल गए और उन्होंने सावित्री से एक और वर मांगने के लिए कहा। तब सावित्री ने वर मांगा, ‘मैं सत्यवान के सौ पुत्रों की मां बनना चाहती हूं। कृपा कर आप मुझे यह वरदान दें।’ सावित्री की पति-भक्ति से प्रसन्न हो इस अंतिम वरदान को देते हुए यमराज ने सत्यवान की जीवात्मा को पाश से मुक्त कर दिया और अदृश्य हो गए। सावित्री जब उसी वट वृक्ष के पास आई तो उसने पाया कि वट वृक्ष के नीचे पड़े सत्यवान के मृत शरीर में जीवन का संचार हो रहा है। कुछ देर में सत्यवान उठकर बैठ गया। उधर सत्यवान के माता-पिता की आंखें भी ठीक हो गईं और उनका खोया हुआ राज्य भी वापस मिल गया।

Vat Savitri Varat Katha in English

Vaṭ saavitrii(vat savitri) vrat kii yah kathaa satyavaan-saavitrii ke naam se uttar bhaarat men vishesh ruup se prachalit hain. Kathaa ke anusaar ek samay kii baat hai ki madradesh men ashvapati naam ke dharmaatmaa raajaa kaa raaj thaa. Unakii koii bhii santaan nahiin thii. Raajaa ne santaan hetu yajñ karavaayaa. Kuchh samay baad unhen ek kanyaa kii praapti huii jisakaa naam unhonne saavitrii rakhaa. Vivaah yogy hone par saavitrii ke lie dyumatsen ke putr satyavaan ko patiruup men varaṇ kiyaa. Satyavaan vaise to raajaa kaa putr thaa lekin unakaa raaj-paaṭ chhin gayaa thaa owr ab vah bahut hii draridrataa kaa jiivan jii rahe the. Usake maataa-pitaa kii bhii aankho kii roshanii chalii gaii thii. Satyavaan jangal se lakadiyaan kaaṭakar laataa owr unhen bechakar jaise-taise apanaa gujaaraa kar rahaa thaa. Jab saavitrii owr satyavaan ke vivaah kii baat chalii to naarad muni ne saavitrii ke pitaa raajaa ashvapati ko bataayaa ki satyavaan alpaayu hain owr vivaah ke ek varsh baad hii unakii mṛtyu ho jaaegii. Haalaanki raajaa ashvapati satyavaan kii gariibii ko dekhakar pahale hii chintit the owr saavitrii ko samajhaane kii koshish men lage the.
Naarad kii baat ne unhen owr chintaa men ḍaal diyaa lekin saavitrii ne ek n sunii owr apane nirṇay par aḍig rahii. Amtatah saavitrii owr satyavaan kaa vivaah ho gayaa. Saavitrii saas-sasur owr pati kii sevaa men lagii rahii. Naarad muni ne satyavaan kii mṛtyu kaa jo din bataayaa thaa, usii din saavitrii bhii satyavaan ke saath van ko chalii gaii. Van men satyavaan lakadii kaaṭane ke lie jaise hii ped par chadhane lagaa, usake sir men asahaniiy piidaa hone lagii owr vah saavitrii kii god men sir rakhakar leṭ gayaa. Kuchh der baad unake samaksh anek duuton ke saath svayam yamaraaj khade hue the. 

Jab yamaraaj satyavaan ke jiivaatmaa ko lekar dakshiṇ dishaa kii or chalane lage, pativrataa saavitrii bhii unake piichhe chalane lagii. Aage jaakar yamaraaj ne saavitrii se kahaa, ‘he pativrataa naarii! Jahaan tak manushy saath de sakataa hai, tumane apane pati kaa saath de diyaa. Ab tum lowṭ jaao. Is par saavitrii ne kahaa, ‘jahaan tak mere pati jaaenge, vahaan tak mujhe jaanaa chaahie.Yahii sanaatan saty hai.’ yamaraaj saavitrii kii vaaṇii sunakar prasann hue owr use var maangane ko kahaa. Saavitrii ne kahaa, ‘mere saas-sasur amdhe hain, unhen netr-jyoti den.’ yamaraaj ne ‘tathaastu’ kahakar use lowṭ jaane ko kahaa owr aage badhane lage. Kintu saavitrii yam ke piichhe hii chalatii rahii. Yamaraaj ne prasann hokar pun: var maangane ko kahaa. Saavitrii ne var maangaa, ‘mere sasur kaa khoyaa huaa raajy unhen vaapas mil jaae.’ yamaraaj ne ‘tathaastu’ kahakar punah use lowṭ jaane ko kahaa, parantu saavitrii apanii baat par aṭal rahii owr vaapas nahiin gayii. Saavitrii kii pati bhakti dekhakar yamaraaj pighal gae owr unhonne saavitrii se ek owr var maangane ke lie kahaa. Tab saavitrii ne var maangaa, ‘main satyavaan ke sow putron kii maan bananaa chaahatii huun. Kṛpaa kar aap mujhe yah varadaan den.’ saavitrii kii pati-bhakti se prasann ho is amtim varadaan ko dete hue yamaraaj ne satyavaan kii jiivaatmaa ko paash se mukt kar diyaa owr adṛshy ho gae. Saavitrii jab usii vaṭ vṛksh ke paas aaii to usane paayaa ki vaṭ vṛksh ke niiche pade satyavaan ke mṛt shariir men jiivan kaa sanchaar ho rahaa hai. Kuchh der men satyavaan uṭhakar baiṭh gayaa.Udhar satyavaan ke maataa-pitaa kii aankhen bhii ṭhiik ho gaiin owr unakaa khoyaa huaa raajy bhii vaapas mil gayaa.

सकट चौथ व्रत कथा Sakat Chauth Varat Katha



सारे संकटों को दूर करने के लिए माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ(sakat chauth) का व्रत किया जाता है। यह व्रत महिलाएं अपनी संतान की दीर्घायु और सफलता के लिए करती हैं।

पौराणिक कथानुसार, सतयुग में महाराजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक ऋषिशर्मा नामक तपस्वी ब्राह्मण रहता था। पुत्र के जन्म के बाद ब्राह्मण की मृत्यु हो गई। पुत्र का लालन-पालन उसकी पत्नी ने किया और विधवा ब्राह्मणी भिक्षा मांगकर अपने घर को चलती थी। उसी नगर में ही एक कुम्हार रहता था। वह मिट्टी के बर्तन बनाता था लेकिन उसके बर्तन हमेशा कच्चे रह जाते थे। जिसकी वजह से कुम्हार परेशान रहता था एक दिन उसने एक तांत्रिक से पूछा कि उसके बर्तन पकते क्यों नहीं हैं? इसका कोई समाधान बताएं। इस पर तांत्रिक ने उसे किसी बच्चे की बलि देने को कहा। संकट चतुर्थी के दिन विधवा ब्राह्मणी ने अपने पुत्र के लिए सकट चौथ का व्रत ऱखा। इसी बीच उसका पुत्र गणेश जी की मूर्ति को गले में डालकर खेलने चला गया और कुम्हार ने उसे पकड़ लिया और उसे मिट्टी पकाने वाले आंवा में डाल दिया। इधर उसकी माता अपने पुत्र को ढूंढने लगी, पुत्र के ना मिलने पर विधवा ब्रह्मणी गणेश जी से प्रार्थना करने लगी। रात बीत जाने के बाद सुबह जब कुम्हार पके हुए बर्तनों को देखने आंवा के पास गया तो उसने देखा कि उसमें जांघभर पानी जमा हुआ था और उसके अंदर एक बालक बैठकर खेल रहा था। इस घटना से कुम्हार डर गया और उसने राजदरबार में जाकर सारी आपबीती सुनाई।

तब राजा ने अपने मंत्रियों को भेजा ताकि वह पता लगा सके कि यह पुत्र किसका और कहां से आया है? जब विधवा ब्राह्मणी को पता चला तो वह अपने पुत्र को लेने तुरंत पहुंच गई। राजा ने वृद्धा से पूछा कि ऐसा चमत्कार हुआ कैसे? तो वृद्धा ने बताया कि उसने सकट चौथ का व्रत रखा था और गणेश जी की पूजा-अर्चना की थी। इस व्रत के प्रभाव से उसके पुत्र के पुन: जीवनदान मिला है। तब से महिलाएं संतान और परिवार के सौभाग्य के लिए सकट चौथ का व्रत करने लगीं।


 Sakat Chauth Varat Katha in English

Saare sankaṭon ko duur karane ke lie maagh maas kii kṛshṇ paksh kii chaturthii tithi ko sakaṭ chowtha(sakat chauth) kaa vrat kiyaa jaataa hai. Yah vrat mahilaaen apanii santaan kii diirghaayu owr saphalataa ke lie karatii hain.

Powraaṇik kathaanusaar, satayug men mahaaraajaa harishchandr ke raajy men ek ṛshisharmaa naamak tapasvii braahmaṇ rahataa thaa. Putr ke janm ke baad braahmaṇ kii mṛtyu ho gaii. Putr kaa laalan-paalan usakii patnii ne kiyaa owr vidhavaa braahmaṇii bhikshaa maangakar apane ghar ko chalatii thii. Usii nagar men hii ek kumhaar rahataa thaa. Vah miṭṭii ke bartan banaataa thaa lekin usake bartan hameshaa kachche rah jaate the. Jisakii vajah se kumhaar pareshaan rahataa thaa ek din usane ek taantrik se puuchhaa ki usake bartan pakate kyon nahiin hain? Isakaa koii samaadhaan bataaen. Is par taantrik ne use kisii bachche kii bali dene ko kahaa. Sankaṭ chaturthii ke din vidhavaa braahmaṇii ne apane putr ke lie sakaṭ chowth kaa vrat ऱkhaa.
Isii biich usakaa putr gaṇesh jii kii muurti ko gale men ḍaalakar khelane chalaa gayaa owr kumhaar ne use pakad liyaa owr use miṭṭii pakaane vaale aanvaa men ḍaal diyaa. Idhar usakii maataa apane putr ko ḍhuunḍhane lagii, putr ke naa milane par vidhavaa brahmaṇii gaṇesh jii se praarthanaa karane lagii. Raat biit jaane ke baad subah jab kumhaar pake hue bartanon ko dekhane aanvaa ke paas gayaa to usane dekhaa ki usamen jaanghabhar paanii jamaa huaa thaa owr usake amdar ek baalak baiṭhakar khel rahaa thaa. Is ghaṭanaa se kumhaar ḍar gayaa owr usane raajadarabaar men jaakar saarii aapabiitii sunaaii. 

Tab raajaa ne apane mantriyon ko bhejaa taaki vah pataa lagaa sake ki yah putr kisakaa owr kahaan se aayaa hai? Jab vidhavaa braahmaṇii ko pataa chalaa to vah apane putr ko lene turant pahunch gaii. Raajaa ne vṛddhaa se puuchhaa ki aisaa chamatkaar huaa kaise? To vṛddhaa ne bataayaa ki usane sakaṭ chowth kaa vrat rakhaa thaa owr gaṇesh jii kii puujaa-archanaa kii thii. Is vrat ke prabhaav se usake putr ke pun: jiivanadaan milaa hai. Tab se mahilaaen santaan owr parivaar ke sowbhaagy ke lie sakaṭ chowth kaa vrat karane lagiin.

जितिया व्रत कथा Jitiya Varat Katha



जीवित्पुत्रिका व्रत को जिउतिया अथवा जितिया(jitiya) भी कहा जाता है इसकी भी एक कथा मिलती है। बहुत समय पहले की बात है कि गंधर्वों के एक राजकुमार हुआ करते थे, नाम था जीमूतवाहन। बहुत ही पवित्र आत्मा, दयालु व हमेशा परोपकार में लगे रहने वाले जीमूतवाहन को राजपाठ से बिल्कुल भी लगाव न था लेकिन पिता कब तक संभालते। वानप्रस्थ लेने के पश्चात वे सबकुछ जीमूतवाहन को सौंपकर चले गए। लेकिन जीमूतवाहन ने तुरंत अपनी तमाम जिम्मेदारियां अपने भाइयों को सौंपते हुए स्वयं वन में रहकर पिता की सेवा करने का मन बना लिया। अब एक दिन वन में भ्रमण करते-करते जीमूतवाहन काफी दूर निकल आया। उसने देखा कि एक वृद्धा काफी विलाप कर रही है। जीमूतवाहन से कहां दूसरों का दुख देखा जाता, उसने सारी बात पता लगाई तो पता चला कि वह एक नागवंशी स्त्री है और पक्षीराज गरुड़ को बलि देने के लिये आज उसके इकलौते पुत्र की बारी है। जीमूतवाहन ने उसे धीरज बंधाया और कहा कि उसके पुत्र की जगह पर वह स्वयं पक्षीराज का भोजन बनेगा। अब जिस वस्त्र में उस स्त्री का बालक लिपटा था उसमें जीमूतवाहन लिपट गया। जैसे ही समय हुआ पक्षीराज गरुड़ उसे ले उड़ा। जब उड़ते उड़ते काफी दूर आ चुके तो पक्षीराज को हैरानी हुई कि आज मेरा यह भोजन चीख चिल्ला क्यों नहीं रहा है। इसे जरा भी मृत्यु का भय नहीं है। अपने ठिकाने पर पंहुचने के पश्चात उसने देखा तो उसमें बच्चे के स्थान पर जीमूतवाहन था। जीमूतवाहन ने सारा किस्सा कह सुनाया। पक्षीराज जीमूतवाहन की दयालुता व साहस से प्रसन्न हुए व उसे जीवन दान देते हुए भविष्य में कभी बलि न लेने का वचन दिया।


मान्यता है कि यह सारा वाकया आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को हुआ था इसी कारण तभी से इस दिन को जिउतिया अथवा जितिया व्रत के रूप में मनाया जाता है ताकि संतानें सुरक्षित रह सकें।

Jitiya Varat Katha in English 

jiivitputrikaa vrat ko jiutiyaa athavaa jitiyaa(jitiya) bhii kahaa jaataa hai isakii bhii ek kathaa milatii hai. bahut samay pahale kii baat hai ki gandharvon ke ek raajakumaar huaa karate the, naam thaa jiimuutavaahana. bahut hii pavitr aatmaa, dayaalu v hameshaa paropakaar men lage rahane vaale jiimuutavaahan ko raajapaaṭh se bilkul bhii lagaav n thaa lekin pitaa kab tak sambhaalate. vaanaprasth lene ke pashchaat ve sabakuchh jiimuutavaahan ko sownpakar chale gae. lekin jiimuutavaahan ne turant apanii tamaam jimmedaariyaan apane bhaaiyon ko sownpate hue svayam van men rahakar pitaa kii sevaa karane kaa man banaa liyaa. ab ek din van men bhramaṇ karate-karate jiimuutavaahan kaaphii duur nikal aayaa. usane dekhaa ki ek vṛddhaa kaaphii vilaap kar rahii hai. jiimuutavaahan se kahaan duusaron kaa dukh dekhaa jaataa, usane saarii baat pataa lagaaii to pataa chalaa ki vah ek naagavamshii strii hai owr pakshiiraaj garud ko bali dene ke liye aaj usake ikalowte putr kii baarii hai. jiimuutavaahan ne use dhiiraj bandhaayaa owr kahaa ki usake putr kii jagah par vah svayam pakshiiraaj kaa bhojan banegaa. Ab jis vastr men us strii kaa baalak lipaṭaa thaa usamen jiimuutavaahan lipaṭ gayaa. Jaise hii samay huaa pakshiiraaj garud use le udaa. Jab udate udate kaaphii duur aa chuke to pakshiiraaj ko hairaanii huii ki aaj meraa yah bhojan chiikh chillaa kyon nahiin rahaa hai. Ise jaraa bhii mṛtyu kaa bhay nahiin hai. Apane ṭhikaane par pamhuchane ke pashchaat usane dekhaa to usamen bachche ke sthaan par jiimuutavaahan thaa. Jiimuutavaahan ne saaraa kissaa kah sunaayaa. Pakshiiraaj jiimuutavaahan kii dayaalutaa v saahas se prasann hue v use jiivan daan dete hue bhavishy men kabhii bali n lene kaa vachan diyaa.

Maanyataa hai ki yah saaraa vaakayaa aashvin maas ke kṛshṇ paksh kii ashṭamii ko huaa thaa isii kaaraṇ tabhii se is din ko jiutiyaa athavaa jitiyaa vrat ke ruup men manaayaa jaataa hai taaki santaanen surakshit rah saken.